विस्थापित के मामले में 28 साल बाद मानी भूल

Sonbhadra Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
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अनपरा (सोनभद्र)। आखिर 28 साल बाद अनपरा तापीय परियोजना प्रबंधन ने विस्थापित राम अधार पनिका मामले में अपनी भूल स्वीकार कर ली। परियोजना ने मान लिया है कि उसके सेवायोजन का अभिलेख त्रुटिपूर्ण है और विस्थापन नीति के तहत दिए जाने वाले समस्त लाभ का वह पात्र है। यह सब संभव हुआ चार अप्रैल को अमर उजाला में खबर छपने के बाद।
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बता दें, 1978 से 1984 के मध्य अनपरा में प्रदेश सरकार द्वारा 3130 मेगावाट बिजली पैदा करने के लिए 5276 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। इसमें 3100 एकड़ भूमि किसानों से सीधे अधिग्रहीत की गई थी। इसी के तहत अनपरा गांव के रामअधार पनिका की भी 6 बीघा 3 बिस्वा जमीन चली गई थी। तब 1987 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने पचास प्रतिशत से अधिक भूमि अधिग्रहीत होने वाले परिवारों के एक सदस्य को नौकरी देना तय किया था। इसके तहत अपनी सौ फीसदी भूमि खोने वाले राम अधार पनिका भी इसका पात्र था। क्योंकि पनिका 1972 से एनसीएल बीना में नौकरी कर रहा था, इसलिए उसने अनपरा परियोजना में अपनी पत्नी यशोदा देवी को सेवायोजित किए जाने की बात रखी। तब यशोदा देवी ने तत्कालीन एक्सईएन कार्यांलय में 29 जुलाई 1987 को इंटरव्यू भी दिया। यशोदा देवी का आरोप है कि उससे आठ हजार रुपए की मांग की गई जिसे पूरा न करने पर उसे नौकरी नहीं दी गई। इसके बाद परिजनों ने इस मामले को औचित्यहीन समझते हुए अनपरा परियोजना आना ही बंद कर दिया। इस बीच जब नई भूमि अधिग्रहण नीति 2011 के तहत सभी विस्थापितों से सहमति पत्र मांगा गया तो राम अधार पनिका को फिर उम्मीद जगी। लेकिन इस बार उसके आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसे तो सात जून 1988 को सेवायोजित कर दिया गया है। परियोजना ने आरटीआई के तहत दिए गए सूचना में भी सेवायोजित विस्थापितों के 54वें क्रमांक पर रामअधार पनिका पुत्र लोलर को सेवायोजित दिखाया। इस खबर को चार अप्रैल 2012 के अंक में अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाते हुए खुलासा किया कि रामअधार पनिका एनसीएल बीना से 2006 में सेवानिवृत्त हुआ था ऐसे में अनपरा परियोजना द्वारा उसे 7 जून 1988 को सेवायोजित दिखाने में कोई सत्यता नहीं है। खबर का असर यह हुआ कि परियोजना ने फिर जांच कराई और अपनी गलती मान ली।
इस मामले को देख रहे अधिशासी अभियंता टीएल कनक ने बताया कि रामअधार पुत्र लोलर को सेवायोजन नहीं दिया गया है बल्कि अभिलेखों में उसका नाम त्रुटिवश अंकित हो गया था। संबंधित अधिकारी टीएल कनक ने भी अभिलेखों में दर्ज त्रुटियों को स्वीकार करते हुए रामअधार पनिका को नियमानुसार पुनर्वास लाभ मिलने की बात कही।
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