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अस्पताल में एंबुलेंस तो हैं चालक नहीं

Sonbhadra Updated Wed, 18 Jul 2012 12:00 PM IST
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सोनभद्र।सोनांचल में लगता है कि स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। क्योंकि चालकों के अभाव में दर्जन भर एंबुलेंस धूल फांक रही हैं। जिसका सीधा असर यह है कि दुरूह और नक्सल क्षेत्र के मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में फजीहत हो जा रही है। लंबी दूरी तय करके मरीजों को पैदल अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है।
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जिले की भौगोलिक स्थित ऐसी है कि यहां के लोगों को अस्पताल पहुंचने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। कई किलोमीटर चलने के बाद ही अस्पताल पहुंचने के लिए साधन मिल पाता है। दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां से अस्पताल की दूरी तीस से चालीस किलोमीटर है। सूबे के एक छोर पर बसे इस जिले मेें विगत दो वर्ष पूर्व बसपा सरकार ने दर्जन भर से अधिक एंबुलेंसों को चालू कराकर जन-जन को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ देने का प्रयास किया था। एंबुलेेंसों के चालू होने से बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और एमपी बार्डर से सटे गांवों के मरीजों को अस्पताल में आने-जाने में अधिक सुविधा हो गई थी। खासकर गर्भवती महिलाओं को इससे ज्यादा राहत मिलती थी। शासन ने वर्ष 2012-13 में संविदा पर तैनात चालकों के नवीनीकरण करने का आदेश नहीं दिया। कई माह से पगार न मिलने से नाराज चालकों ने एंबुलेंस चलाना बंद कर दिया है। इससे एंबुलेंस खड़ी हो गई हैं। इस बारे में सीएमओ डा. रामअवध यादव का कहना है कि शासन स्तर से संविदा पर तैनात चालकों की सेवा समाप्त कर दी गई है। संभावना है कि उच्चाधिकारियों द्वारा अगस्त से चालकों की सेवा बहाल होगी।

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