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पेट की खातिर सड़क पर उतरेंगे व्यवसायी

Sonbhadra Updated Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
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सोनभद्र। जिला प्रशासन द्वारा करीब चार महीने से खनन बंद करने तथा उसे चालू नहीं कराने से लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। पेट की आग बूझाने और बेरोजगारी से आक्रोशित व्यवसायी और मजदूरों ने सड़क पर उतरने का निर्णय लिया है। मांगों को लेकर गठित खनन संघर्ष समिति का एक प्रतिनिधि मंडल जिलाधिकारी से मिला। छह सूत्री मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपते हुए चेताया कि मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा। इस दौरान समिति के लोगों ने जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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ओबरा खनन हादसे के बाद 28 फरवरी से जिले में सभी प्रकार के खनन पर रोक लगा दी गई है। खनन बंद होने से लोगों को गिट्टी और बालू नहीं मिल पा रहा है। बढ़ती महंगाई से आम नागरिक त्रस्त है। बैंक से लोन और अपने सगे-संबंधियों से पैसा मांगकर लोग किसी तरह मकान बनवा रहे थे। खनन बंद होने से गिट्टी और बालू का दाम कई गुना बढ़ गया है। ट्रांसपोर्टर दूसरे प्रदेशों से गिट्टी और बालू लाकर बेच रहे हैं। कई गुना दाम बढ़ने की वजेह से लोगों ने अपने मकान का निर्माण कार्य रोक दिया है जबकि बैंक का ब्याज उन्हें देना पड़ रहा है। फिर भी प्रदेश सरकार चुप्पी साधे हुए है। लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन खनन पर रोक क्यों लगाई है। संघर्ष समिति ने जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में कहा कि खनन बंद करते समय कहा गया था दस मार्च तक भौतिक सत्यापन के बाद पट्टों को चालू कर दिया गया जाएगा लेकिन चार माह बीतने तथा औपचारिकता पूरा करने के बाद भी अभी तक खनन चालू नहीं किया गया। समिति के सदस्यों ने बताया कि जनपद का डोलो स्टोन, सैंड स्टोन और बालू का व्यवसाय सरकार को प्रतिमाह लगभग तीस करोड़ रुपए का राजस्व आयकर, व्यापार कर, खनन रायल्टी, बिजली बिल तथा विकास प्राधिकरण के रूप में देता है। इस व्यवसाय से लगभग पचास हजार श्रमिक प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार से जुड़े थे। कहा कि खनन व्यवसाय राष्ट्रीय, प्रांतीय और सार्वजनिक निर्माण कार्य में अपनी सहभागिता स्पष्ट रूप से दर्ज कराता है। खनन क्षेत्र में लगी मशीनों पर बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं का ऋण और व्यवसाय बंद होने से ऋण का भुगतान नहीं हो पा रहा है। क्रशर प्लांटों का बिजली बिल भुगतान नहीं हो पा रहा है। वहीं बंदी के कारण क्रशर प्लांटों एवं मशीनों की सुरक्षा न होने से चोरी की घटनाएं बढ़ गई तथा क्षेत्र में अशांति का माहौल बन गया है। ज्ञापन सौंपने वालों में समिति के अध्यक्ष राहुल श्रीवास्तव, सचिव वीरेन्द्र सिंह, मीडिया प्रभारी एसपी सिंह, कौशलेंद्र सिंह, रामू सिंह, प्रेमनारायण राय, सत्येन्द्र कुमार, ज्ञानेन्द्र यादव, अरविंद सिंह, विवेक सिंह, मनोज मिश्र, लालजी मिश्र, गणेश सिंह आदि थे।

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