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प्रत्याशियों को महिलाओं के वोट पर ज्यादा भरोसा

Sonbhadra Updated Thu, 21 Jun 2012 12:00 PM IST
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सोनभद्र। नगर निकाय चुनाव के तीसरे चरण में चार जुलाई को होने वाले मतदान को लेकर चुनाव में उतरे प्रत्याशियों ने जोर आजमाइश शुरू कर दी है। प्रत्याशी लोगों से मिलकर वोट मांगते हुए नगर को सुविधाओं से लैस करने का वादा कर रहे हैं लेकिन बात जम नहीं रही है। यही कारण है कि प्रत्याशियों ने अब आधी आबादी को साधने की कोशिशें तेज कर दी हैं। गृहणियों तक अपनी बात पहुंचाने के लिए प्रत्याशी महिलाओं का सहारा ले रहे हैं। राबट़्र्सगंज में दो से तीन दर्जन महिलाएं विभिन्न प्रत्याशियों के पक्ष में गृहणियों के समक्ष रखने के लिए दिन रात एक किए हैं। किराए पर रखी गई महिलाओं की बातें गृहणियां कितनी सुनती है यह आने वाला समय बताएगा।
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राबर्ट्सगंज नगर पालिका सीट पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित किया गया है। वर्तमान में पंद्रह प्रत्याशी अध्यक्ष पद के लिए जोर आजमाइश कर रहे हैं। इसमें एक महिला प्रत्याशी भी शामिल हैं। चुनाव चिह्न आवंटन के पूर्व तक चुनावी शोर अधिक नहीं था लेकिन प्रत्याशियों को पहचान मिलते ही उन्होंने आक्रामक प्रचार शुरू कर दिया है। प्रत्याशी पंफलेट, पोस्टर, कार्ड आदि के माध्यम से सबके दिलों में बसना चाहते हैं। यही नहीं जनसंपर्क में नगर की सूरत बदलने का वादा कर रहे हैं। बावजूद इसके अभी तक नगरवासियों की विशेष प्रतिक्रिया नहीं देखने का मिली है। इससे प्रत्याशियों के समक्ष मुश्किल आने लगी है। यही देखते हुए विभिन्न प्रत्याशियों ने महिलाओं को रिझाने का प्रयास शुरू किया है। राबर्ट्सगंज नगर पालिका क्षेत्र की आबादी करीब डेढ़ लाख है तथा यहां 44 हजार 500 मतदाता हैं। मतदाताओं में बीस हजार की संख्या करीब महिलाओं की है। आमतौर पर माना जाता है कि घर के मालिक के इशारे पर ही महिलाएं प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान करती हैं, लेकिन यहां करीब 70 फीसदी आबादी साक्षर हैं। महिलाओं की मर्जी भी विशेष महत्व रखती है। ऐसे में महिलाएं जिसके पक्ष में होंगी, पूरा परिवार उसी के पक्ष में मतदान करेगा। आखिर हो भी क्यों न पानी अनापूर्ति, साफ-सफाई का अभाव आदि समस्याएं महिलाओं को अधिक झेलनी होती है। ऐसे में महिलाओं को पक्ष करना ज्यादा जरूरी है। नगर के पुरुष सदस्य दिन में अधिकांशत अपने काम पर निकल आते हैं और महिलाएं तथा बच्चे घर में अकेले रह जाते हैं। ऐसे में पुरुष सदस्यों के चुनाव प्रचार के लिए पहुंचने पर महिलाएं घर से बाहर भी नहीं निकल रही हैं। इसी वजह से प्रत्याशियों ने घरों के अंदर घुसने के लिए महिलाओं का सहारा लिया है। सभी प्रत्याशियों ने रोजाना मजदूरी की शर्त पर एक से डेढ़ दर्जन महिलाओं को चुनाव प्रचार में लगाया है।
महिलाएं भी प्रत्याशी का पंफलेट लेकर सुबह होते ही प्रचार में निकल पड़ रही है। महिलाएं बहिन, चाची कहकर घर में घुस जा रही हैं तथा प्रत्याशी का कार्ड, घोषणाओं की प्रति आदि थमा रही हैं तथा वोट मांग रही हैं। महिलाओं पर इसका असर भी पड़ रहा है और वे महिलाओं की बातें ध्यान से सुन रहीं है। अब यह वोट में कितना तब्दील हो पाएगा समय बताएगा लेकिन आधी आबादी को साधने में यह तरकीब खूब काम आ रही है।
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