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टपकते गोदामों में सुरक्षित कैसे रहेगा गेहूं

Sonbhadra Updated Tue, 19 Jun 2012 12:00 PM IST
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सोनभद्र। मानसून सिर पर है। जिले में गेहूं खरीद जारी है। यही नहीं लेवी के चावलों के आने का सिलसिला जारी है तथा पूरा गोदाम भरा हुआ है। कई केंद्रों पर खुले आसमान के नीचे गेहूं रखा जा रहा है। ऐसे में बारिश होने पर गेहूं सुरक्षित रखना मुश्किल होगा। जनपद में बीस हजार मीट्रिक टन क्षमता वाला एक गोदाम के अलावा दो-दो हजार मीट्रिक टन क्षमता वाले एक दर्जन गोदाम हैं। इनमें से अधिकतर गोदामों की हालत दयनीय है और बारिश होने पर इनकी छतें टपकती हैं। ऐसे में अनाजों की सुरक्षा को लेकर अभी से ही अधिकारियों के हाथ पांव फूलने लगे हैं। प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी क्रय केंद्रों पर तिरपाल से ढंक कर अनाजों की सुरक्षा की नाकाम कोशिश की तैयारी की जा रही है। मेहनत से उगाई गई फसलों की यह स्थिति देख कर किसान चिंतित और नाराज नजर आ रहे हैं।
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पहाड़ियों के विस्तृत भूभाग पर पसरे सोनांचल के बहुत कम रकबे में अनाज की खेती होती है। मैदानी भागों में किसान निजी संसाधनों के सहारे मेहनत से धान, गेहूं जैसे पारंपरिक फसलों को उगाते हैं, लेकिन इन अनाजों को सुरक्षित रखने के पर्याप्त इंतजाम शासन द्वारा अब तक नहीं किया जा सका है। विशेष कर बारिश के दौरान अनाजों को भीगने के लिए छोड़ दिया जाता है। यही कारण है कि प्रति वर्ष सोनांचल में कई टन अनाज भीग कर बर्बाद हो जाते हैं। जनपद में धान और गेहूं खरीद कर सुरक्षित रखने के लिए बीस हजार मीट्रिक टन क्षमता का मात्र एक गोदाम बनाया गया है। इसके अलावा खाद्य विभाग द्वारा राबर्ट्सगंज में दो दो हजार मीट्रिक टन क्षमता के दो गोदाम बनाए गए हैं। इसी तरह अन्य क्रय एजेंसियों के साधन सहकारी समितियों पर पांच सौ से एक हजार कुंतल अनाज रखने की क्षमता वाला गोदाम बना है, परंतु अधिकांश गोदामों की हालत देखभाल के अभाव में जर्जर है। मुख्य गोदाम की हालत कुछ ठीक ठाक है, लेकिन यह पूरी तरह भरा हुआ है। जनपद में अभी भी गेहूं खरीद का काम चल रहा है। ऐसे में अधिकतर केंद्रों पर बाहर खुले में गेहूं रखे जा रहे हैं। बारिश होने पर अनाजों को भीगने से बचाना मुश्किल होगा। पीसीएफ के क्रय केंद्र पर चार हजार मीट्रिक टन की क्षमता वाले गोदामों में भी जनपद में वितरण होने के लिए गेहूं चावल आदि आता है। गोदाम की स्थित यह है कि इसकी छत जगह-जगह से टूटी है। ऐसे में हल्की बारिश में भी गोदाम में पानी भर जाता है। इस तरह अनाजों के खराब होने की संभावना बनी रहती है। यही नहीं विभिन्न सहकारी समितियों के गोदामों पर भी गेहूं के भीगने की आशंका है। ऐसे में उन्हें बचाना मुश्किल होगा। इस संबंध में किसानों का कहना है कि वे हाड़तोड़ मेहनत कर पथरीली जमीन पर अनाज उगाते हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही से उनकी मेहनत बेकार जा रही है।
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