बालश्रम मुक्ति को चेतना जरूरी

Sonbhadra Updated Thu, 14 Jun 2012 12:00 PM IST
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म्योरपुर। बालश्रम समाज के लिए अभिशाप है। देश हित के लिए बालश्रम चिंता का विषय है। इसके समाप्ति के लिए यह जरूरी है कि अभिभावक अपने बच्चे के बारे में सोचें और बाल श्रम के लिए न भेजें। ये बातें प्रख्यात समाजसेविका और गांधीवादी विचारक डा. रागिनी बहन ने मंगलवार की देर शाम वनवासी सेवा आश्रम द्वारा आयोजित अंतराष्ट्रीय बाल श्रम मुक्ति दिवस पर ग्राम निर्माण खैराही के परिसर में गोष्ठी में कहीं।
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डा. रागिनी ने कहा कि बच्चों को मोबाइल और टीवी पर ज्यादा समय नहीं देना चाहिए। मां-बाप को इसकी चिंता करने की जरूरत है। जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि रामविचार गौतम ने कहा कि बाल श्रम जिले में सबसे अधिक हो रहा है। मां बाप गरीबी से तंग आकर बच्चों को बाल श्रम के लिए भेजते हैं। कहा कि इसके लिए शिक्षा का प्रसार आवश्यक है। कहा कि आज लोग संस्कार युक्त वचन सुनने से परहेज करते हैं पर विचार और संस्कार ही बच्चे को महान बनाता है। गौरी शंकर सिंह ने कहा कि सर्वाधिक बाल श्रम होटलोंऔर ऊंचे घरानों में हो रहा है। इसे कानून के सहारे रोक पाना मुश्किल है। बाल अधिकार परियोजना की निदेशक शुभ्रा बहन ने गोष्ठी की भूमिका रखते हुए बारह जून को दुनिया के हर देश में बालश्रम की घटनाएं हो रही है। गोष्ठी में जिला पंचायत सदस्य प्रमिला देवी, बाल अधिकार परियोजना के ब्लाक संयोजक अश्वनी सिंह, देवनाथ सिंह, राधेकृष्ण, अमिता विश्वकर्मा, गायत्री बहन, शिवनारायण थे।
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