मजदूर विरोधी काम कर रही है प्रदेश सरकार

Sonbhadra Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
ओबरा (संवाददाता)। पत्थर खनन व क्रेशर प्लांट चालू कराने की मांग दिन प्रतिदिन जोर पकड़ता जा रहा है। खनन कार्य बंद होने से प्रदेश सरकार को जहां राजस्व की क्षति हो रही है, वहीं मजदूरों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। खनन चालू करने को लेकर रमेश सिंह यादव ने कहा कि लगभग तीन माह से खनन कार्य बंद होने से मजदूरों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है। साथ में जीविकोपार्जन का भी संकट पैदा हो गया है।
खनन कार्य चालू करने को लेकर प्रदेश सरकार की मंशा साफ नहीं हो पा रही है। प्रदेश सरकार मजदूर विरोधी कार्य कर रही है, जिससे मजदूरों को परेशानियां झेलनी पड़ रही है। खनन कार्य चालू नहीं किया गया तो हजारों मजदूरों के घरों के चूल्हे जलना बंद हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि खनन बंद होने से बड़ी संख्या में लोग जनपद से पलायन भी कर रहे हैं। इतना ही नहीं पूर्वांचल में विकास कार्य भी ठप हो चुका है। शासन-प्रशासन मजदूर हित को देखते हुए खनन कार्य यथाशीघ्र चालू कराए। बताते चलें कि व्यवसायी, श्रमिक संगठन के अलावा सत्तारूढ़ दलों के नेताओं द्वारा भी जिलाधिकारी से खनन चालू करने की मांग की जा चुकी है।
खनन कार्य बंद होने से जनपद सहित आसपास से सटे गैर प्रांतों के हजारों मजदूर भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके हैं, वहीं प्रदेश सरकार को तीन माह लगभग कई करोड़ का नुकसान हो चुका है। नवागत जिलाधिकारी के आने के पश्चात क्रेशर, खनन व्यवसायियों में यह आस लगी है कि खनन कार्य शीघ्र ही चालू करा दिया जाएगा। लेकिन अब तक खदानों के चालूू न होने से व्यापारियों व वैध पट्टाधारकों में मायूसी छाई हुई है।

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