टमाटर के किसानों को लुभा रहीं कंपनियां

Sonbhadra Updated Mon, 04 Jun 2012 12:00 PM IST
केकराही। टमाटर उत्पादक क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध करमा इलाके में इस वर्ष फिर से टमाटर बीज कंपनियों की जंग शुरू हो गई है। एक दर्जन से अधिक बीज कंपनियां अपनी कंपनी के बीज किसानों को देने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहीं हैं। पिछले वर्ष अच्छी बारिश की वजह से टमाटर किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। ऐसे में किसान अभी तक टमाटर की खेती को लेकर उहापोह में हैं। बावजूद इसके कंपनी के प्रतिनिधियों को विश्वास है कि किसान बीज को खरीदेंगे और वे लाभ कमाएंगे।
सूखे के दौरान पिछले एक दशक में टमाटर ने किसानोंका खूब साथ दिया है। यही कारण है कि कभी बंजर हो चुकी जमीन पर किसानों ने टमाटर की खेती शुरू की तथा यह पूरी तरह सफल हुआ। इससे न सिर्फ जमीन की कीमत बढ़ी, बल्कि इस खेती से किसानों को अच्छा मुनाफा हुआ। स्थिति यह हुई कि खेती का रकबा बढ़ते बढ़ते पचास हजार हेक्टेयर पार कर गया। करमा, केकराही, पिपरा, जरेरूआ, जुड़वट, खैरपुर, सिरसिया, कुसी सहित घोरावल इलाके के दर्जनों गांव सिर्फ टमाटर की खेती के लिए ही प्रसिद्ध हो गए। इस खेती को बढ़ावा देने में निजी हाइब्रिड कंपनियों का बड़ा योगदान रहा है। निजी कंपनियों ने न सिर्फ किसानों को प्रोत्साहित किया, बल्कि उधार पर बीज भी उपलब्ध कराए।
अत्यधिक खपत को देखते हुए नई-नई कंपनियों ने दस्तक देना शुरू कर दिया है। आज स्थिति यह है कि एक दर्जन से अधिक कंपनियां किसानों को बीज उपलब्ध कराने के लिए आपस में गलाकाट स्पर्धा कर रही हैं। पिछले वर्ष लाइको, सुपर लक्ष्मी, जेके देशी, जेके नंदिनी, 1195, 5005, 3585, यूएस 404,04, 800, भूमिका, अभिलाष, धनलक्ष्मी, भाग्या, 3618 जैसी कंपनियों ने किसानों को बीज उपलब्ध कराए थे। बीज कंपनियों के आंकड़ों पर विश्वास करें, तो चार से पांच हजार टमाटर उत्पादक किसानों ने दस कुंतल बीज खरीदे थे। हालांकि सितंबर माह में आयी बाढ़ की वजह से अस्सी फीसदी फसल बर्बाद हो गई थी। बाद में किसानों ने दुबारा बीज की रोपाई की, लेकिन फसल का उचित मूल्य न मिलने की वजह से किसानों का भारी नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे में इस वर्ष किसान अभी भी उहापोह में हैं कि वे खेती करें या नहीं। वैसे टमाटर की खेती के लिए अभी समय है, लेकिन टमाटर बीज कंपनियों ने शुरुआती तेजी दिखानी शुरू कर दी है। गांवों में बीज कंपनियों के पोस्टर चिपक गए हैं तथा कंपनियों के नुमाइंदे चौपाल लगाकर किसानों को बीज के फायदे गिनवा रहे हैं। महंगाई के बावजूद कंपनियों ने प्रतिस्पर्धा में पिछले वर्ष की ही कीमत कायम रखी है। इस वर्ष भी किसानों को 220 से तीन सौ रुपये प्रति दस ग्राम की दर से बीज उपलब्ध करा रहे हैं। इस संबंध में कंपनी के प्रतिनिधियों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा की बात दूसरी है, लेकिन यहां के लोगों को टमाटर की खेती से फायदा हुआ है। ऐसे में इस वर्ष भी कंपनियों के बीज किसान खरीदेंगे। जो ज्यादा जनसंपर्क करेगा, उसका बीज अधिक बिकेगा। इसी वजह से पूरी कवायद की जा रही है। क्षेत्र के सियाराम यादव, चंद्रप्रकाश सिंह, भुनेश्वर सिंह, घासी मौर्य, राजनारायण, राजेन्द्र सिंह, बनारसी, अफ्तार आलम आदि किसानों का कहना है कि भले ही बीज कंपनियां प्रचार करें, लेकिन अभी किसान पूरी तरह से टमाटर की खेती के लिए तैयार नहीं हैं।

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