बभनी के मनरेगा श्रमिकों का 5 करोड़ बकाया

Sonbhadra Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
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बभनी। बभनी विकास खंड में मनरेगा मजदूरों का करीब पांच करोड़ रुपये बकाया है। मजदूरी न मिलने से जहां मजदूराें के सामने भुखमरी की स्थिति आ गई है वहीं मनरेगा का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। विकास खंड में करीब तीस प्रतिशत कार्य अभी भी बकाया है। मजदूर बकाया मजदूरी के लिए लगातार आंदोलन कर रहे हैं। फिर भी उनकी मांगाें पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में प्रधानों, सेक्रेटरियों का गांव में निकलना मुश्किल हो गया है। वे न तो मजदूरी का भुगतान कर पा रहे हैं और न ही काम।
मजदूरों को सौ दिन रोजगार देने के उद्देश्य से छह वर्ष पूर्व महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण सुनिश्चित रोजगार योजना की शुरुआत हुई। इसके तहत काम करने के इच्छुक जाबकार्ड धारकों को वर्ष में सौ दिनों का रोजगार दिया जाना था। सोनांचल में यह योजना अधिकारियों की लापरवाही से परवान नहीं चढ़ सकी है। कहीं मजदूरों को सौ दिनों का रोजगार नहीं मिला है तो कहीं मजदूरों को उनकी मजदूरी। योजना में जमकर धांधली की गई है। धांधली का नतीजा है कि समय से इस योजना के लिए धन नहीं मिल रहा है, जिसका असर विकास कार्य पर पड़ रहा है। 31 ग्राम पंचायतों वाले बभनी विकास खंड में मजदूरों को पिछले पांच माह से मजदूरी नहीं मिली है। गांवों में कूप, बाउली, संपर्क मार्ग निर्माण के अलावा समतलीकरण, पौधरोपण आदि के कार्य कराए गए हैं। इसमें हजारों मजदूरों को रोजगार मिला है लेकिन मजदूरी का भुगतान अब तक नहीं हो सका है। पूरे विकास खंड की बात करें तो पांच माह में मजदूरों का करीब पांच करोड़ रुपये मजदूरी बकाया है। धनखोर में पंद्रह लाख, चौना ग्राम पंचायत में ग्यारह लाख, बैना में पांच लाख, बभनी में 35 लाख, हथियार में पंद्रह लाख, सतबहिनी में 18 लाख, धनवार में 12 लाख, डुमरहर में दस लाख, भलपहरी में बारह लाख रुपये मजदूरी बकाया है। नियमानुसार काम के पंद्रह दिन के भीतर जॉबकार्ड धारकों के बैंक खाते में मजदूरी का धन पहुंच जाना चाहिए लेकिन विकास खंड में पांच माह से मजदूर अपने मजदूरी के इंतजार में है। रोज कुंआ खोद कर पानी पीने वाले मजदूर मजदूरी के अभाव में भुखमरी के कगार पर हैं। समय से मजदूरी न मिलने की वजह से ही मजदूरों का मजदूरहितकारी योजना से मोहभंग होने लगा है। वे काम की तलाश में क्षेत्र से पलायन करने को मजबूर हैं। मजदूर बकाये के लिए लगातार प्रधान और सेक्रेटरियों के घर के चक्कर काट रहे हैं लेकिन मजदूरी नहीं मिल रही है। प्रधान और सेक्रेटरी भी ग्रामीण मजदूरों से नजर बचाकर इधर- उधर भाग रहे हैं। ऐसे में गांवों के विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो गांवों में लक्ष्य के अनुरूप सत्तर प्रतिशत कार्य होने के बाद से काम बंद हैं। बारिश के पहले कूप, बाउली आदि का निर्माण पूरा नहीं हुआ तो बारिश में कूप बाउली आदि बैठ जाएगा। ऐसे में लाखों बर्बाद हो जाएंगे।

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