प्लास्टिक के बनने लगे सूप और दउरी

Sonbhadra Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
दुद्धी। वनस्पतियों और वनोपज के सहारे जीवन यापन करने वाले आदिवासी इलाकों में आधुनिकता की पैठ बढ़ती जा रही है। सुविधाओं के बढ़ने से वे लगातार वनों से दूर होते जा रहे है। इसका कारण है बाजारों में बांस की जगह प्लास्टिक के दउरी, सूप और पंखे का बढ़ता प्रचलन है। प्लास्टिक के सूप दउरी आदि के बाजार में आने से बांस की दउरी समेत अन्य समान बनाकर जीविकोपार्जन करने वाले धारकार जाति के लोगों के समक्ष जीविका का संकट पैदा हो गया है।
प्लास्टिक के आने से जहां लोगों का जीवन आसान हुआ है वहीं पर्यावरण के लिए प्लास्टिक सबसे बड़ा दुश्मन बन है। प्लास्टिक के विरोध में विश्वव्यापी अभियान चलाया जा रहा है। मगर सोनांचल में इसकी दखल बढ़ती ही जा रही है। यहां तक कि अब तो प्लास्टिक बांस का भी विकल्प बनने लगा है। आदिवासी इलाकों में प्लास्टिक से बने सूप, दउरी, रेक आदि तेजी से बिक रहे हैं। सस्ते, आकर्षक और टिकाऊ होने की वजह से लोग बांस के स्थान पर प्लास्टिक के सामान खरीदना ज्यादा पसंद करते हैं। क्षेत्र के धारकार बस्ती के लोग जंगलों से बांस काटकर इसे छील कर पतले-पतले टुकड़ों से आकर्षक सूप, दउरी, छइटी आदि बनाते हैं। बाजार में इसे पचास से डेढ़ सौ रुपये प्रति नग की दर से इसे बेचते रहे हैं। बाजार में प्लास्टिक के दउरी जहां पचास से साठ रूपये में मिल रहा है वहीं सूप पंद्रह रुपए में। आकर्षक होने की वजह से भी यह लोगों की पसंद बनता जा रहा है। रामदीन, संतु धरकार, परमात्मा आदि ने बताया कि महंगाई की वजह से पहले ही उनकी आजीविका मुश्किल से चल रही थी।

अब प्लास्टिक के सामान बिकने से कोई बांस के महंगे सामान खरीदना नहीं चाहता है।

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

Most Read

Rohtak

40 करोड़ की लागत से फोरलेन बनेगा चरखीदादरी-रोहतक रोड

40 करोड़ की लागत से फोरलेन बनेगा चरखीदादरी-रोहतक रोड

20 फरवरी 2018

Related Videos

VIDEO: स्वच्छता अभियान के लिए जब सड़क पर उतर आए तीन लाख लोग

यूपी के सोनभद्र में स्वच्छता अभियान को बढ़ावा देने के लिए तीन लाख लोगों ने हाथों में हाथ डालकर 130 किमी लंबी मानव श्रृंखला बनाई। 

2 फरवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Switch to Amarujala.com App

Get Lightning Fast Experience

Click On Add to Home Screen