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खाद्य सुरक्षा अधिनियम की प्रतियां जलाईं

Sonbhadra Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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सोनभद्र। केंद्र सरकार द्वारा पांच अगस्त 2011 को पूरे देश में लागू खाद्य सुरक्षा कानून को अत्यंत जटिल और अव्यवहारिक बताते हुए गुरुवार को व्यापारियों ने कानून की प्रतियां जलाईं। बाद में व्यापारियों ने व्यापारियों की समस्याओं से संबंधित मुख्यमंत्री को संबोधित बीस सूत्री ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा। इस दौरान चेतावनी दी कि व्यापारियों के लिए अहित इस कानून को निष्प्रभावी नहीं किया गया तो व्यापारी आंदोलन करेंगे।
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पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के आह्वान पर सुबह ग्यारह बजे व्यापारी राबर्ट्सगंज मेन चौक पर एकत्र हुए। यहां सभा की तथा खाद्य सुरक्षा कानून की प्रतियां जलाई गईं। सभा में उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यपाल जैन ने कहा कि लाइसेंस फीस का निर्धारण टर्नओवर के आधार पर किया गया है जो गलत है। इसे फुटकर व्यापारी, थोक व्यापारी और निर्माता के आधार पर होना चाहिए। पूर्व में लाइसेंस और नवीनीकरण शुल्क सौ रुपये, दो हजार और साढ़े सात हजार से घटाकर पचास, सौ और दो सौ रुपये किया जाए। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस लेने के लिए पंद्रह सोलह प्रकार के कागजात और फार्मेल्टी का निर्देश दिया गया है, रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया इतनी जटिल है कि उसे पूरा कर पाना असंभव है। रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस के लिए प्रार्थना पत्र, एड्रेस प्रूफ लेकर बाजार कस्बों में कैंप लगाकर कैंप स्थल पर ही रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस जारी करें। अधिनियम में निर्माण स्थल पर साफ-सफाई व्यवस्था के जो मानक तय हैं वे बड़े उद्योगों के लिए ही संभव है। कुटीर उद्योग और लघु उद्यमियों के लिए मानकों का पालन असंभव है। मल्टी नेशनल और बड़ी कंपनियों के शील्ड पैक माल का सेंपल फेल आने पर कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाए, खुदरा व्यापारियों को मुकदमे में अभियुक्त न बनाया जाए। सभी खाद्य पदार्थों के मल्टीनेशनल कंपनियों के शापिंग मालों के घरानों और कंपनियों द्वारा चलाए जा रहे रेस्टोरेंटों, थोक और खुदरा व्यापारियों के सैंपल समान अनुपात में भरे जाएं।
खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम सिर्फ बड़े उद्योगों के लिए हो, छोटे व्यापारियों, कुटीर उद्योगों, लघु उद्यमियों को इसे अलग रखा जाए। लाइसेंस बनाने की सीमा चार अगस्त 2012 से बढ़ा कर दिसंबर 2012 किया जाए। गलतियों पर जुर्माना कम करने, स्वास्थ्य के लिए हानिकार वस्तुओं पर जेल के स्थान पर जुर्माना की मांग की। मध्य प्रदेश सरकार ने व्यापारियों की कठिनाइयों को देखते हुए इस कानून को निष्प्रभावि कर दिया है। उत्तर प्रदेश में भी इसे निष्प्रभावि किया जाए। चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर वे आंदोलन को विस्तारित करेंगे।
इस दौरान सभा और ज्ञापन सौंपने वालों में जिला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष रतनलाल गर्ग, चंद्रभान अग्रवाल, शिव कुमार सावरिया, मुकेश जायसवाल, धर्मराज जैन, कृष्ण मुरारी गुप्ता, रामेश्वर जैन, सरदार गोविंद सिंह, राजेश गुप्ता, सालिक राम चौरसिया, पुरषोत्तम जालान, संतोष केशरी, नीतेश जालान आदि शामिल थे।
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