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कीटनाशक भी पी गए प्रधान जी

Sonbhadra Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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सोनभद्र। गांवों के विकास का जिम्मा कंधे पर उठाए ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि गांवों के विकास में गोलमाल कर रहे हैं। कुछ योजनाओं के धन का तो ग्रामीणों को पता भी नहीं चलता है कि वे कब प्रधान जी के पेट में चले गए। गांवों में पोषण, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य समिति को मिले धन का ऐसा ही हश्र हो रहा है। प्रधानों ने बगैर खर्च किए पूरे धन का गोलमाल कर लिया है। यही कारण है कि पिछले वित्तीय वर्ष में प्रधानों को पैसे ही नहीं दिए गए हैं।
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स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्राम पंचायतों के पोषण, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य समिति निधि में प्रति राजस्व गांव के हिसाब से दस हजार रुपये प्रति वर्ष दिए जाते हैं। इन पैसों से प्रधान को गांवों में साफ-सफाई, मच्छररोधी दवाओं का छिड़काव कराना होता है। सोनांचल में 501 ग्राम पंचायत तथा 13 सौ राजस्व गांव हैं। इस तरह प्रतिवर्ष एक करोड़ तीस लाख रुपये ग्राम पंचायतों के खाते में दिए जाते हैं। एक ग्राम पंचायत में दो से तीन राजस्व गांव हैं। इस तरह एक प्रधानों को बीस से तीस हजार रुपये प्रतिवर्ष दिए जा रहे हैं लेकिन प्रधानों द्वारा इस पैसे का इस्तेमाल नहीं जा रहा है। कागजों पर तो गांवों में प्रतिवर्ष कीटनाशकों को छिड़काव किया जा रहा है तथा नालियां आदि साफ की जा रही हैं और कुओं में ब्लीचिंग पाउडर डाल कर उसके पानी को विसंक्रमित किया जा रहा है। लेकिन हकीकत में कहीं ऐसा नहीं दिख रहा है।

वर्ष 2010 में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए गए थे। गांवों में समितियों के गठन के बाद प्रधानों को पैसा मिला, लेकिन वे उसे खर्च ही नहीं कर पाए। नए प्रधानों द्वारा खर्च नहीं दिखा पाने के कारण ही पिछले वित्तीय वर्ष में प्रधानों के खाते में पैसे ही नहीं दिए जा सके हैं। इस तरह अभी भी ग्राम पंचायतों के खाते में एक करोड़ से अधिक रुपये डंप हैं। अति पिछड़े सोनांचल में गांवों में बीमारियां महामारी के रूप में फैलती हैं। प्रतिवर्ष गमी में डायरिया, लू लगने सहित विभिन्न बीमारियों से लोगों की मौत होती है। यदि प्रधान जी समय से कीटनाशकों का छिड़काव करा दें तथा कुओं में ब्लीचिंग पाउडर डालकर उसे विसंक्रमित कर दें तो बड़ी बीमारियोंसे बचा जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।
राजनीति की वजह स्वास्थ्य विभाग भी इन पैसों को खर्च करने के लिए जोर नहीं डाल पाता। इस तरह पूरा पैसा प्रधानों की जेब में जा रहा है।

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