कवि सम्मेलन में खूब लगे ठहाके

Sonbhadra Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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ओबरा (संवाददाता)। रविवार की शाम मिल्लत नगर स्थित कैरियर कान्वेन्ट स्कूल में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें कवियों द्वारा अपनी रचनाओं से खूब वाहवाही लूटी।
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कवि गिरीश मिश्र आहत ने एक अरब की आबादी आजादी का परिणाम कहो क्या कम विकास है, जहां संतरी से मंत्री तक भरे पड़े बेईमान, मानव वन में ढूंढे से भी मिले नहीं इंसान। भ्रष्टाचार चरम पर है, नैतिकता है बेइमान कहो क्या कम विकास है, पंक्तियां सुना कर भ्रष्टाचार बेइमान व विकास का वर्णन किया। पीएन सिंह मीरजापुरी ने रोज पार्टी बदल रहे नेता, जन न जाने कहां ये कब खुद ही खो जाएंगे, कभी इस घर कभी उस घर घूम रहे, कब कहां किस ओर मुंह मार जाएंगे, इनके सहारे देश छोड़ोगे अगर, यार खुद को बचाने में हम डूब जाएंगे की पंक्तियां सुना कर वर्तमान स्थिति में हो रही राजनीति के बारे में दर्शाया। कवियों में राजेंद्र प्रसाद उपाध्याय, डा. राम लखन जंगली, डीएन मिश्रा, सुनील पांडेय, संतोष पांडेय ने भी रचनात्मक पंक्तियां के माध्यम से देश में हो रहे भ्रष्टाचार को बताया। कार्यक्रम की शुरुआत में कवियों द्वारा हास्य कविता सुनाकर किया। सीआईएसएफ के डिप्टी कमांडेंट अनिल कुमार वर्मा ने पंक्ति रोता रहता है दिल मेरा, कि नौजवानों की आंखें नम हैं, क्यों नौजवानों के खून में लौह कम है, सुनाया। इस दौरान आरआर शर्मा, दीनानाथ, रमेश सिंह, सुनील, अरविंद, अशोक यादव आदि उपस्थित थे।

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