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आदिवासियों की जीविका का साधन बना महुआ

Sonbhadra Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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बभनी (संवाददाता)। आदिवासी बाहुल्य इलाकों में घर-घर महुआ की शराब बनाई जाती है। यूं कहे कि आदिवासी इलाके के रहने वाले लोगों के जीविका का मुख्य साधन महुआ से शराब बनाना है। यदि महुआ की शराब न हो तो शायद इनका कोई कार्यक्रम पूरा न हो सकेगा।
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बच्चे के जन्म से लेकर शादी तक के हर कार्यक्रमों में शराब की आवश्यकता लोगों को महसूस होती है। घर में आए मेहमानों का स्वागत भी आदिवासी महुआ की शराब से करते हैं। कोई भी कार्यक्रम हो महुआ की शराब को वरीयता दी जाती है। वनों के भीतर या वनों से लगे ग्रामीण क्षेत्रों मेें महुआ के पेड़ की प्रमुखता से रखवाली की जाती है। चूंकि महुआ उनके जीवन का आधार बन चुका है इस लिए वह इनकी स्वयं सुरक्षा करते हैं। आदिवासी अपनी और परिवार की भरण पोषण इन्हीं महुओं से करते हैं। आदिवासी महिलाओं के लिए मानों महुआ के पेड़ ही निवास स्थान बन जाता है। रात हो या दिन आदिवासी परिवार महुआ को इकट्ठा कर दुकानदारों को बेचते हैं और बदले में उनसे भोजन की सामग्री जैसे तेल, हल्दी, मसाला आदि खरीदते हैं।

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