करोड़ों खर्च फिर भी तरस रहे पानी कोे

Sonbhadra Updated Tue, 01 May 2012 12:00 PM IST
घोरावल। घोरावल तहसील के अंतर्गत ग्राम समूह पेयजल योजना जलनिगम के अधिकारियों की भेंट चढ़ गया। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी लोग प्यासे हैं। एक-दो समूहों से पानी आपूर्र्ति हो भी रहा है तो कुछ ही गांवों में। योजना बंद होने से पाइपलाइन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। भीषण गर्मी में ग्रामीणों के सामने पेयजल संकट पैदा हो गया है। पेयजल आपूर्ति के लिए ग्रामीणों द्वारा लगातार धरना-प्रदर्शन करने के बाद भी अधिकारियों के सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा ज्यादा है कि विधानसभा चुनाव में पेयजल संकट दूर करना जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता में थी। मगर चुनाव बाद जनप्रतिनिधि भी दिखाई नहीं पड़े।
तीन दशक पहले ग्रामीणों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत करोड़ों रुपये की लागत से कोहरथा, शिवद्वार, मुक्खा और पगिया में नलकूप लगाने के साथ ओवरहेड पानी टंकी बनाई गई। योजना का उद्घाटन तत्कालीन सिंचाई मंत्री किया था। ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि गांव में पेयजल संकट खत्म हो जाएगा। मगर समय के साथ लोगों को पानी संकट से निजात मिलने की बजाय बढ़ता गया। बता दें कि वर्ष 1981 में शुरू हुई योजना के तहत कोहरथा गांव में तीन टंकियों का निर्माण किया गया। इन टंकियों से 11 गांवों पानी आपूर्ति की गई। इसी प्रकार
हिरणखुरी टंकी से 24 गांवों को एवं चौखड़ा टंकी से नौ गांवों को पेयजल आपूर्ति कराने की योजना थी। मुक्खा ग्राम समूह पेयजल योजना अंतर्गत मुक्खा एवं अमिलौंधा में ओवरहेड टंकी का निर्माण कराया गया। इससे 13 गांवों को पानी उपलब्ध कराना था। पगिया ग्राम समूह पेयजल योजना से आठ गांवों को। वर्ष 1981 से 1995-96 तक तो पानी टंकियों से आपूर्ति होता रहा। मगर आगे अधिकारियों द्वारा ध्यान नहीं देने पर पेयजल आपूर्ति होना धीरे-धीरे बंद होने लगी। वर्ष 2008-09 में तहसील क्षेत्र के तीनों पेयजल योजनाओं की पाइपलाइन एवं अन्य उपकरणों की मरम्मत हेतु जलनिगम के अभियंताओं को तत्कालीन जिलाधिकारी अजय शुक्ला ने तीन करोड़ रुपये मुहैया कराए। मगर मौके पर काम होने की बजाय फाइलों में किया गया। ग्रामीणों की मांग पर क्षेत्र के विधायक रमेश दूबे ने जलनिगम के अधिशासी अभियंता फणींद्र राय को पेयजल आपूर्ति सामान्य कराने को कहा। बावजूद इसके अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया। लोगों का कहना है कि जब से योजना शुरू हुई इै तब से पूरे मामले की जांच कराई जाए तो करोड़ों रुपये के बंदरबांट का मामला उजागर हो सकता है। हालत यह है कि इन टंकियों पर आपरेटर, फीटर एवं चौकीदार के पद पर दर्जनभर कर्मचारियों की तैनाती है।

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