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हरैया से कूच कर नगवां कोथावां पहुंचा रामादल

सीतापुर Updated Sun, 18 Feb 2018 10:38 PM IST
सीतापुर चौरासी परिक्रमा में शामिल साधु-संत।
सीतापुर चौरासी परिक्रमा में शामिल साधु-संत। - फोटो : अमर उजाला
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पौराणिक 84 कोसी परिक्रमा के में शामिल श्रद्धालुओं ने रविवार की भोर हरैया पड़ाव से कूच किया। ढोल नगाड़ों की ध्वनी पर नाचते गाते लाखों की संख्या में श्रद्धालु नगवां कोथावां पड़ाव पर पहुंचे। इस दौरान श्रद्धालुओं ने रास्ते में पड़ने वाले तीर्थों में डुबकी लगाई और मंदिरों में पूजा अर्चना की। रविवार को नगवां कोथावां में रामनगरी बस गई थी, जहां पर रामधुन गूंजने लगी।
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रामादल शनिवार को पहले पड़ाव कोरौना से हरैया पड़ाव के लिए हरदोई सीमा में प्रवेश कर गया था। शनिवार की रात रामादल ने हरैया पड़ाव पर डेरा डाला। वहां पर पूरी रात रामधुन गूंजती रही। इस दौरान संत व महंतों ने हर्रैया स्थल के बारे में पौराणिक महत्वों का वर्णन किया।

हरैया के बारे में साधु,संतों का कहना था कि यह हरि का क्षेत्र है। जिसको पहले लोग हरिक्षेत्र कहते थे, समय के साथ इसका नाम बदला और अब हर्रैया हो गया। रविवार की भोंर एक बार फिर से डंका बजा और शंखनाद से श्रद्धालुओं की नींद टूटी, जिसके बाद मोक्ष की कामना लेकर परिक्रमा को निकले साधु, संत व महंतों ने कूच कर दिया।

अपने सफर के दौरान श्रद्धालु रामधुन में मस्त नजर आ रहे थे। अपने इस सफर के दौरान श्रद्धालुओं ने रास्ते में पडने वाले कुमनेश्वर, कुर्कुरी, मानसरोवर, कोटिश्वर, महादेव आदि तीर्थ स्थलों के दर्शन किए। पौराणिक अमर कष्टक में स्नान किया।

यहां पूजा-अर्चना करने के साथ ही श्रद्धालुओं ने नगवां कोथावां में डेरा डाला। श्रद्धालु राम नगरी बसाकर पूजा- अर्चना और भजन तथा कीर्तन में जुट गए। संत व महंत श्रद्धालुओं को वेद, पुराणों का ज्ञान बांट रहे थे। वहीं लोगों को पड़ाव स्थल का महत्व भी समझा रहे थे। श्रद्धालुओं का मानना है कि 15 दिनों की परिक्रमा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। 

नैमिषारण्य से परिक्रमा प्रारंभ होकर इस अरण्य क्षेत्र में पडने वाले सभी तीर्थों मेें होते हुए मिश्रिख तीर्थ पहुंचती है। मिश्रित तीर्थ महान तपस्वी एवं जन कल्याण के लिए निज देह का त्याग करने वाले महर्षि दधीचि की नगरी है।

यहां पर पंच कोसी परिक्रमा का विधान है। जो लोग 84 कोसी परिक्रमा नहीं कर पाते हैं, वह यह पंच कोसी परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या तीन लाख से अधिक आंकी जा रही है। परंपरा है कि नगवां कोथावां में रात्रि विश्राम करने के बाद श्रद्धालु अगले दिन गिरधरपुर उमरारी के लिए रवाना होंगे।

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