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घूस मांगने का ऑडियो वायरल करने के मामले में सचिव ने भेजा जवाब

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 01 Oct 2020 10:58 PM IST
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सीतापुर। आवास योजना में प्रधानों से धनराशि लेकर सहायक लेखाकार को देने के मामले में पंचायत सचिव ने काफी समय बाद स्पष्टीकरण का जवाब दिया है। इस मामले में सहायक लेखाकार पहले ही निलंबित हो चुके हैं। जवाब में सारा दोष सहायक लेखाकार पर ही थोपा गया है। जवाब में पंचायत सचिव ने कहा है कि सहायक लेखाकार धनराशि लेने के लिए दबाव बना रहे थे। ऐसे में मजबूरी में खुद ही ऑडियो वायरल किया था। अब सचिव के जवाब का परीक्षण कर डीपीआरओ द्वारा निर्णय लिया जाएगा।
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प्रकरण विकासखंड बेहटा का है। यहां तैनात सहायक लेखाकार सलिल कुमार श्रीवास्तव को जून में निलंबित किया गया था। इनके विरुद्ध भाजपा नेता दीपक कुमार सिंह ने ग्राम्य विकास मंत्री से फरवरी माह में शिकायत की थी। इसमें आरोप लगाया था कि सहायक लेखाकार अपना कार्य छोड़कर प्रधानों व लाभार्थियों से आवास समेत अन्य योजनाओं का लाभ देने के नाम पर खुली धन उगाही कर रहे हैं। घूस मांगने की क्लिप उपलब्ध होने का भी उल्लेख किया था। आयुक्त ग्राम्य विकास ने सीडीओ को जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

शिकायतकर्ता ने डीडीओ के समक्ष 20 जून को उपस्थित होकर घूस मांगने वाला ऑडियो सुनाया था। इसमें सहायक लेखाकार द्वारा धनराशि मांगने की प्रथमदृष्ट्या पुष्टि होना पाया गया। प्रकरण में तत्कालीन डीएम अखिलेश तिवारी ने बीडीओ बेहटा की 24 जून की जांच का उल्लेख करते हुए सहायक लेखाकार के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए निदेशक को पत्र भेजा था। इसी आधार पर निदेशक आंतरिक लेखा एवं लेखा परीक्षा संतोष अग्रवाल ने सहायक लेखाकार को निलंबित किया था।
वरिष्ठ कोषाधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया था। मामले में पंचायत सचिव आनंद कुमार से सीडीओ ने जुलाई माह में स्पष्टीकरण मांगा था। इसका जवाब पंचायत सचिव ने अब दिया है। जिसमें कहा है कि सहायक लेखाकार सलिल कुमार श्रीवास्तव द्वारा मुझ पर आवासों में प्रधानों से धनराशि वसूलकर देने का दबाव कई माह से बनाया जा रहा था। जिसके चलते उनके द्वारा मेरे विरुद्ध कार्रवाई भी किए जाने की बात कही जा रही थी।
जिस कारण मानसिक तनाव में आकर सलिल श्रीवास्तव को प्रधानों से धन दिलाने का आश्वासन फोन पर देकर वाइस रिकार्डिंग कर बीडीओ के समक्ष लाने एवं भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से की गई थी। इसे तत्कालीन बीडीओ को भी सुनाया गया। उसके बाद भी मुझे बार-बार प्रधानों से आवास में पैसा दिलाए जाने का दबाव सहायक लेखाकार द्वारा बनाया जाता रहा। जिससे क्षुब्ध होकर मुझे
ऑडियो रिकार्डिंग को सार्वजनिक करने पर मजबूर होना पड़ा। किसी से धनराशि नहीं वसूली है। न ही सहायक लेखाकार को दी है। स्पष्टीकरण में विलंब के लिए क्षमा मांगी गई है। सीडीओ संदीप कुमार ने जवाब को डीपीआरओ को परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई करने के लिए भेजा है।

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