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बच्चों को अभी स्कूल भेजने को तैयार नहीं अभिभावक

Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 01 Oct 2020 11:03 PM IST
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सीतापुर। कोरोना का संक्रमण जिले में भले ही कम हो रहा है, लेकिन इसका खौफ बरकरार है। माध्यमिक स्कूल/कॉलेजों में विद्यार्थी परामर्श के लिए आ सकते है, इसके लिए अभिभावकों से सहमति प्रमाणपत्र मांगा गया था, जिसमें केवल 30 फीसदी अभिभावकों ने ही सहमति दी है। 70 फीसदी अभिभावक अभी बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते है। अभिभावकों का कहना है कि कोरोना का संक्रमण अभी फैल रहा है। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजना अनुकूल नहीं है।
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केंद्र सरकार द्वारा जारी अनलॉक 4 में 21 सितंबर से स्कूल खोलने की बात कही गई थी। लेकिन यह अभिभावकों की सहमति के आधार पर होगी। इस पर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जिले के सभी राजकीय/सहायता प्राप्त/ वित्तविहीन कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को पत्र जारी किया था। जिसके जरिए कहा था कि सभी अभिभावकों से इस बात का सहमति प्रमाणपत्र ले लिया जाए कि वह अपने बालक/बालिका को रेगुलर पढ़ाई के लिए नहीं बल्कि स्कूल के शिक्षकों से परामर्श के लिए भेज सकते है।

इस दौरान कॉलेजों में कोई कक्षाएं नहीं चलेंगी। न ही जूनियर व सीनियर वर्ग के विद्यार्थी एक साथ कॉलेज आएंगे। अगर आएंगे तो वह कोविड प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन करेंगे। इस पर प्रधानाचार्यों ने ऑनलाइन चल रही पढ़ाई के दौरान ही सहमति ली थी, जिसमें करीब 70 फीसदी अभिभावकों ने इस बात के लिए सहमति नहीं दी है। इन अभिभावकों का कहना है कि जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं आती है, तब तक वह अपने बच्चों को विद्यालय नहीं भेजेंगे। ऑनलाइन पढ़ाई ही इस समय सबसे बेहतर साधन है। 30 फीसद अभिभावकों ने इस बात की सहमति दे दी है कि वह अपने बच्चों को कॉलेज परामर्श के लिए भेज सकते हैं।
जिले में 57 राजकीय, 54 सहायता प्राप्त व 287 वित्तविहीन कॉलेज है। इन 398 कॉलेजों में 153757 विद्यार्थी कक्षा 9वीं से 12वीं तक में पंजीकृत है, जिसमें एक लाख तीन हजार विद्यार्थियों के पास लैपटॉप व हाईटेक मोबाइल है। यह विद्यार्थी रोजाना ऑनलाइन पढ़ रहे हैं, जबकि 50413 इससे कट गए है। इसमें सर्वाधिक 10वीं में 16650 व 12वीं के करीब 13 हजार विद्यार्थियों के पास कोई साधन नहीं है। जबकि सबसे अधिक जरूरत इन बोर्ड के विद्यार्थियों को ही है।
विद्यार्थी कॉलेज में परामर्श के लिए आ सकते हैं। इसके लिए अभिभावकों से सहमति प्रमाणपत्र मांगा गया था। अभी तक आई जानकारी में 30 फीसदी अभिभावकों ने सहमति दी है।
- नरेंद्र शर्मा, डीआईओएस

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