सीतापुर में गूंजने लगा अप्रवासी पक्षियों का कलरव

सीतापुर/ब्यूरो Updated Wed, 05 Dec 2012 11:59 AM IST
migratory birds is coming in sitapur
सर्दी की दस्तक के साथ ही अप्रवासी पक्षियों की रंगत जिले में दिखने लगी है। ‘विदेशी मेहमान’ यहां की झीलों में अपना डेरा जमा चुके हैं। तटीय इलाकों व झीलों के आसपास पक्षियों के कलरव कानों में मिठास घोल रहे हैं। यूरोपीय देशों से आने वाले यह मेहमान झुंड के रूप में यहां पहुंच रहे हैं।

हालांकि यह पक्षी हर साल नवंबर के अंत तक यहां आ जाते थे, लेकिन इस बार थोड़ी लेटलतीफी हो गई। करीब चार माह के प्रवास के बाद पक्षी फरवरी अंत तक वापस अपने वतन लौट जाएंगे। जिले में अब तक पांच हजार से अधिक परिंदे डेरा डाल चुके हैं। दूर देश की धरती से आने वाले यह रंग-बिरंगे पक्षी सालों से लोगों के कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बने हैं।

अभी तक विदेशी पक्षियों में पैलिकन, वृह्मनी डक, बार हेडेड डक तथा देश में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के सारस यहां पहुंच चुके हैं। जिले में कुल बाइस झीलें हैं। इन पक्षियों को बेहतर वातावरण देने के लिए जिला वेटलैंड कमेटी ने इस बार जिले की सबसे बड़ी अज्जेपुर झील समेत कई अन्य झीलों का सौंदर्यीकरण भी कराया है। ताकि विदेशी पक्षियों की तादात बढ़ सके।

वन विभाग से जुड़े अधिकारियों की मानें तो रेउसा ब्लॉक की अज्जेपुर झील, बिसवां ब्लॉक की तेंदुआ झील, कसमंडा ब्लॉक की सीता रसोई झील, खैराबाद ब्लॉक की अरसेनी झील में अब तक पांच हजार से अधिक परिंदे अपना डेरा डाल चुके हैं। वहीं पिछले साल जिले में करीब 35 हजार अप्रवासी पक्षी आए थे। इस बार इनकी संख्या अधिक होने की संभावना जताई जा रही है। इन झीलों में साइबेरियन क्रेन, चलही, सुरखाब, करकरा सारस, कालाबाजा आदि विदेशी पक्षियों का आना शुरू हो गया है।

फरवरी में लौट जाएंगे वतन
करीब तीन हजार किलोमीटर की उड़ान भरकर यह पक्षी नवंबर के अंत में यहां आते हैं। ठंड के मौसम में प्रदेश के कुछ तटीय इलाकों का वातावरण उन्हें अनुकूल मिलता है। यह पक्षी फरवरी के अंत तक यहां रहेंगे। इसके बाद फिर वापस अपने वतन लौट जाएंगे। झुंडों में आने वाले विदेशी मेहमान यहीं पर अंडे देते हैं। चार माह के प्रवास के दौरान अंडों से चूजे निकलने के बाद उनके बड़े होते ही पक्षी उन्हें अपने साथ लेकर वापस लौट जाते हैं।

संरक्षण को बरसों से कर रहे संघर्ष
रेउसा विकास खंड के सालपुर की झील करीब तीन सौ एकड़ में फैली है। क्षेत्रीय पर्यावरण प्रेमी डॉ. माधवराम मिश्रा इस झील पर विदेशी अतिथियों के संरक्षण के लिए बरसों से संघर्ष कर रहे हैं। 78 वर्षीय डॉ. माधवराम ने इन विदेशी पक्षियों के लिए बसेरों का भी निर्माण कराया है। उन्होंने बताया की बीते वर्षों में अकेले इसी झील पर छह-सात हजार विदेशी पक्षी आए थे। इस वर्ष अब तक भारी तादाद में मेहमान पक्षी आ चुके हैं। इस वर्ष सर्दी पड़ने की संभावना अधिक है। इसकी वजह से इन पक्षियों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।

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