पंेशनरों पर भारी पड़ रही सरकारी खानापूरी

Sitapur Updated Sun, 24 Nov 2013 05:41 AM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
सीतापुर। सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद बुजुर्ग पेंशनर खुद के जीवित होने का सबूत देने के लिए कोषागार के चक्कर लगाने को विवश हैं। दरअसल, शासन ने विभिन्न सरकारी महकमों से सेवानिवृत्त पेंशनरों के लिए हर वर्ष जीवित होने का प्रमाण पत्र देने की अनिवार्यता बना रखी है। यही अनिवार्यता हर साल नवंबर में उन पर भारी पड़ जाती है। वे चलने-फिरने लायक भले ही न हों, लेकिन जीवित होने का सुबूत देने के लिए उन्हें कोषागार पहुंचना ही पड़ता है। एक नवंबर से जीवित प्रमाणपत्र जमा कराने का कार्य चल रहा है, जो 21 दिसंबर तक चलेगा। बेबसी, लाचारी और परेशानी के बीच ये बुजुर्ग सरकारी अनिवार्यता का पालन कर रहे हैं।
विज्ञापन

मालूम हो कि जिले में कुल 13 हजार पेंशनर हैं। इनमें अब तक साढ़े चार हजार पेंशनरों ने जीवित होने की पुष्टि कर दी है। इस प्रमाण पत्र को देने के लिए कोषागार में पेंशन धारकों को घंटों कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। खास यह कि यह प्रमाण देने के लिए वहां कुछ ऐसे भी बुजुर्ग आते हैं, जिन्हें अपने पैरों पर खड़े होना भी मुशि्कल है। हालांकि विभाग ने पेंशन धारकों की सहूलियत के लिए कोषागार में चार काउंटर खोल रखे हैं लेकिन शरीर खड़ा होने की भी इजाजत नहीं देता। पहले कर्मचारी के सेवानिवृत्त होने की आयु 58 बरस थी। बाद में दो वर्ष बढ़कर 60 बरस कर दी गई है। जबकि शिक्षा विभाग में शिक्षकों की आयु 62 वर्ष है। इन सभी को कोषागार से पेंशन मिलने की व्यवस्था है।
इन पेंशन धारकों को हर साल नवंबर में ट्रेजरी में उपस्थित होकर जीवित प्रमाण पत्र देना पड़ता है। इसी अनिवार्यता के अनुपालन में हर साल नवंबर और दिसंबर माह में सेवानिवृत्त बुजुर्ग पेंशनर को खुद के जिंदा होने का सबूत देने के लिए कोषागार आना पड़ता है। सरकारी अभिलेखों के मुताबिक सीतापुर के विभिन्न महकमों के 13 हजार पेंशनर हैं। इनके सापेक्ष अब तक तकरीबन साढे़ चार हजार पेंशन धारक अपने जीवित होने का प्रमाण पत्र दे चुके हैं।
शेष पेंशनर यह प्रमाण पत्र देने के लिए लगातार कोषागार आ रहे हैं। भीड़ की वजह से जीवित होने का सबूत देने को उन्हें लाइनें भी लगानी पड़ रही हैं। शनिवार को भी कोषागार में सैकड़ों की तादाद में बुजुर्ग पेंशनर  आए। ऐसे में यह प्रमाण पत्र देने को आए बुजुर्गों को घंटों इंजतार करना पड़ा। कई तो ऐसे रहे जिन्हें सहारा देने के लिए परिवारी जन भी उनके साथ थे। धन की जरूरत के लिए ये बुजुर्ग बेबसी में इस सरकारी अनिवार्यता की खानापूरी करने के विवश हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
  • Downloads

Follow Us