मूल से दूना चुकाया फिर भी कर्जदार

Sitapur Updated Sat, 23 Nov 2013 05:41 AM IST
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सीतापुर। खादी ग्रामोद्योग विभाग के खेल ही निराले हैं। लहरपुर तहसील के एक लाभार्थी ने डेढ़ दशक पहले खस उद्योग के लिए 14 हजार 800 रुपये लोन लिए थे। इस पर उसे 3750 रुपये अनुदान मिला था। कर्ज के एवज में वह मूलधन से दूना धन चुकता कर चुका है। बावजूद इसके उसका लोन खत्म नहीं हो रहा है।
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लोन के बढ़ते मीटर का हाल यह है कि विभाग ने मौजूदा वक्त में उस पर 58 हजार 817 रुपये बकाया दर्शाकर उसकी आरसी भी काट दी है। आरसी कटने के बाद लाभार्थी ने डीएम के यहां अर्जी दी है। उधर विभागीय अफसरों का कहना है कि बकाए के आधार पर आरसी जारी की गई है।
लहरपुर तहसील के परसेंडी ब्लॉक की ग्राम भुंसैला मलरा रौरापुर निवासी राजकुमार ने डीएम को दिए शिकायती पत्र में कहा है कि वर्ष 1996-97 में खस उद्योग लगाने के लिए उसे खादी ग्रामोद्योग से 14 हजार 800 रुपये स्वीकृत हुए थे, जिसमें तीन हजार 750 रुपये का अनुदान मिला था। लिए गए लोन का वह बराबर पैसा भी जमा कर रहा था। उसका कहना है कि 21 दिसंबर 2006 को विभाग में जब उसने पता किया तो बताया गया कि उसके ऊपर अब 1748 रुपये लोन बकाया है। इस पर उसने 25 सौ रुपए 24 दिसंबर को जमा कर दिए थे। बावजूद इसके 24 अगस्त 2013 को उसके नाम पर 58 हजार 817 रुपया बकाया दिखाकर उसके नाम आरसी जारी कर दी गई। तहसील से बकाया लोन की आरसी पहुंचने के बाद वह परेशान हो गया। अब वह अफसरों के यहां चक्कर लगा रहा है। इस बाबत उसने डीएम के यहां अर्जी भी दी है। इस बाबत जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी कमलेश कुमार
वर्मा ने लाभार्थी को कर्जदार बनाए जाने से इंकार किया। उनका कहना है कि लाभार्थी के नाम दर्ज बकाये के आधार पर ही आरसी जारी की गई है।
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