प्रदेश पुलिस को मिलेंगे 496 चालक

Sitapur Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
सीतापुर। प्रदेश पुलिस में वाहन चालकों की कमी बहुत जल्द पूरी होने वाली है। प्रदेश के एकमात्र पुलिस मोटर वाहन ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे जवानों की ट्रेनिंग पूरी होते ही पुलिस चालकों की कमी नहीं अखरेगी। ट्रेनिंग सेंटर में करीब साढ़े पांच सौ जवान मोटर मैकेनिक व चालक का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन्हें अत्याधुनिक वाहनों के संचालन व उनमें आई खराबी को दूर करने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
राज्य पुलिस मोटर वाहन अधिकारी (एसपीएमवीओ) आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस मोटर वाहन प्रशिक्षण केंद्र (पीएमटीसी) में इस दौरान 496 जवान मोटर चलाने की ट्रेनिंग पर आए हैं। जिन्हें शाखा में चार माह का तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन जवानों को प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न तरह की तकनीकी जानकारियां भी दी जा रही हैं। ट्रेनिंग में इन जवानों को विषम परिस्थितियों में वाहन संचालन का ज्ञान और वाहनों के रखरखाव, ट्रैफिक संबंधी नियमों, प्रबंधन आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही ड्राइविंग सेमुलेटर पर बड़े वाहनों के संचालन की जानकारियां दी जा रही हैं। वाहनों के साथ ही जवानों को अत्याधुनिक क्रेनों को ड्राइव करना भी सिखाया जा रहा है। जवानों को ट्रेनिंग सेंटर में उच्चकोटि का अत्याधुनिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे पुलिस महकमे को तकनीकी चालक मिल सकें। इसके अलावा पीएमटी में 66 पुलिस जवानों को एडवांस मैकेनिक कोर्स कराया जा रहा है। एसपीएमवीओ ने बताया कि यह प्रशिक्षण छह माह का है, जिसमें इन जवानों को तकनीकी ज्ञान, वाहनों की सुधार प्रक्रिया, विभागीय प्रक्रिया आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ट्रेनिंग की अवधि पूरी होने के बाद जवानों को संबंधित यूनिटों में वापस भेज दिया जाएगा। जिसके बाद इन्हें पुलिस मुख्यालय से नई तैनाती दी जाएगी। नई तैनाती के बाद पुलिस विभाग में चल रही वाहन चालकों की कमी की भरपाई की जा सकेगी।

वीवीआईपी वाहन चलाने की दी जा रही विशेष ट्रेनिंग
राज्य पुलिस मोटर वाहन प्रशिक्षण केंद्र में वीवीआईपी वाहन चलाने के लिए ट्रेनिंग में आए जवानों को विशेष तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है। ताकि वीवीआईपी ड्यूटी के दौरान वाहन संचालन में गड़बड़ी न हो सके। जवानों को बुलेट प्रूफ वाहनों के संचालन की जानकारी दी जा रही है।

बड़ी कंपनियों के एक्सपर्ट दे रहे ट्रेनिंग
पुलिस जवानों को विभागीय विशेषज्ञों के अलावा बड़ी प्राइवेट कंपनियों के एक्सपर्ट द्वारा भी ट्रेनिंग दिलाई जा रही है। वाहन निर्माता कंपनियों के विशिष्ट तकनीकी विशेषज्ञ उन्हें गाड़ी चलाते समय बरती जाने वाली सावधानियों को बता रहे हैं।

प्रशिक्षुओं के खेलकूद की भी व्यवस्था
ट्रेनिंग के दौरान किसी प्रकार दबाव व दिक्कत न महसूस हो, इसके लिए जवानों को मनोरंजन के साथ ही खेलकूद के संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि पुलिस जवान मानसिक व शारीरिक रूप से भी फिट रहे। इसके लिए जवानों को क्रिकेट, बालीवॉल, फुटबाल आदि की व्यवस्था भी की गई है।

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