दवाओं के संकट से जूझ रहे अस्पताल

Sitapur Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
सीतापुुर। जिला पुरुष व महिला अस्पताल दवाओं के संकट से जूझ रहे हैं। अस्पताल में दवाओं का स्टाक नाम मात्र का बचा है। जो दवाएं अस्पताल में मौजूद भी हैं, वे बेहद कम मात्रा में हैं। इसका असर सीधे रोगियों पर पड़ रहा है। उन्हें पांच की बजाय दो या तीन दिन की दवा देकर टरकाया जा रहा है। यह व्यवस्था अस्पताल प्रशासन अपने स्तर से लागू किए हुए हैं। जिला अस्पताल में एंटासिड, पेट दर्द की दवाएं नदारद हैं। एंटी एलर्जिक दवाएं कम होने से आउटडोर विंडो के बजाय मेन स्टोर से दी जा रही हैं। इसके अलावा यहां से वही दवाएं दी जा रहीं हैं, जिनका स्टॉक कहने भर को है।
इस अस्पताल को अब तक 65 लाख रुपये दवा के मद में दिए जा गए हैं। इस धनराशि का 20 प्रतिशत लोकल परचेज के मद में रोक लिया गया है। अस्पताल में मौजूदा वक्त में 1200-1300 रोगी रोज आ रहे हैं। जिनमें से 35-50 रोगी भर्ती हो रहे हैं। जिला महिला अस्पताल में यूरिन इंफेक्शन में प्रयोग होने वाली दवा अल्कासॉल स्टॉक से नदारत है। अन्य दवाएं भी काफी कम हैं। अस्पताल के लिए अब तक शासन से 38 लाख रुपये ही दवा के मद में मिले हैं। अस्पताल में मौजूदा वक्त में हर रोज 3500-4000 रोगी आ रहे हैं। इसके अलावा लगभग 140 रोगी रोजाना भर्ती हो रहे हैं। अस्पतालों में दवाओं का संकट दर अनुबंध न होने की वजह से है। क्वांटिटी कंाट्रैक्ट के आधार पर जिन कंपनियों से अनुबंध किया गया, उन्होंने दवाओं की आपूर्ति समय से करने में रुचि नहीं दिखाई। मौजूदा वक्त में अस्पतालों की जो डिमांड कंपनियों के पास है, उनकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। किसी भी अस्पताल में हर प्रकार की एंटीबॉयोटिक दवाएं नहीं हैं। कुछ एंटीबायोटिक सभी मर्जों पर प्रयोग की जा रही हैं।

दर अनुबंध न होने से बढ़ा दवा संकट
वर्ष 2011-2012 व वर्ष 2012-2013 में दवाओंकी क्रय दर अनुबंध न होने से जिले में दवाओं का संकट उत्पन्न हुआ है। यह अनुबंध स्वास्थ्य महानिदेशालय स्तर से किया जाता है। इसके तहत दवाओं का मूल्य व कंपनियों की सूची निदेशालय द्वारा जिले को उपलब्ध कराई जाती है। इसी के आधार पर अस्पताल की क्रय समिति अनुबंधित दरों पर कंपनियों से दवा की डिमांड करती हैं। डिमांड के बाद 6 सप्ताह के अंदर कंपनी को अस्पताल को दवा की आपूर्ति करनी होती है। समयावधि में दवा की आपूर्ति न मिलने पर क्रय समिति डिमांड आर्डर को निरस्त कर दूसरी कंपनी को देने का अधिकार है।

क्वांटिटी कंाट्रैक्ट की सीमा भी समाप्त
जब निदेशालय द्वारा दवाओं का दर अनुबंध नहीं हो पाता है तो क्यूसी (क्वांटिटी कंाट्रैक्ट) के आधार पर निदेशालय द्वारा दवा क्रय की जाती है। मात्रा के अनुसार जिले को उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन इस वर्ष निदेशालय स्तर पर दवाइयों का संकट देखते हुए जिले को क्वांटिटी कंाट्रैक्ट के आधार दवा क्रय करने का निर्देश जारी कर दिया। जो कंपनियां इस श्रेणी में रखी गईं थीं वह समय से दवाओं की आपूर्ति नहीं कर सकीं। अब तो क्वांटिटी कंाट्रैक्ट के आधार पर दवा क्रय क्रय करने की अवधि भी समाप्त हो गई है। इसकी अवधि 31 अक्तूबर तक निर्धारित थी।

अब यह बचा है रास्ता
स्वास्थ्य विभाग अब केंद्रीय दर अनुबंध व तमिलनाडु मेडिकल सर्विस कार्पोरेशन में उपलब्ध दवाइयों को ही क्रय कर सकता है। क्योंकि दवाओं की क्रय दर अनुबंध न होने और क्वांटिटी कंाट्रैक्ट की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। केंद्रीय दर अनुबंध केंद्रीय अस्पतालों में लागू है। निदेशालय ने केंद्रीय दरों पर दवाओं के क्रय करने के निर्देश जारी किये हैं। ऐसे में केंद्रीय दर पर दवा के लिये अनुबंधित कंपनियों पर भार अधिक पड़ गया है। इस वजह से यहां से दवाइयां भी नहीं मिल पा रही हैं।
‘दवाओं की कमी पहले थी, लेकिन अब क्वांटिटी कंाट्रैक्ट के आधार पर कुछ दवाइयां मंगा ली गईं हैं। जरूरत पड़ने पर लोकल परर्चेज के माध्यम से दवाएं मंगा ली जाती हैं। कुछ दवाओं की डिमांड लगी हुई है। जो जल्द ही उपलब्ध हो जाएंगी। इसके लिए कंपनियों से लगातार संपर्क किया जा रहा है।
डॉ. एपी पाण्डेय, सीएमएस, जिला अस्पताल’

‘अस्पताल में दवाओं की कमी नहीं है। अब तक 38 लाख का बजट मिल चुका है, जिससे दवाएं क्रय की गई हैं। डिमांड जाने के बाद अस्पताल को दवा मिलने में समय लग जाता है। तभी कुछ दिक्कतें आती हैं।
डॉ. सुषमा कर्णवाल, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल’

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