छोटे स्टाम्पों की किल्लत, लोग हलकान

Sitapur Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
सीतापुर। सरकारी योजनाओं ने छोटे स्टाम्पों की खपत बढ़ा दी है। दरअसल, जनता को सहूलियतें देने के लिए प्रदेश सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं से लाभान्वित होने के लिए आवेदक को आवेदन के साथ एक हलफनामा भी देना होता है। इसके लिए आवेदक को छोटे स्टाम्पों की जरूरत होती है, मगर ये स्टाम्प उन्हें नहीं मिल रहे हैं। छोटे स्टाम्पों की किल्लत केवल मुख्यालय पर ही नहीं, बल्कि पूरे जिले में है। जानकारों की माने तो कई सरकारी योजनाओं के शुरू होने के बाद एकाएक छोटे स्टाम्पों (पांच, दस एवं बीस रुपये वाले) की खपत बढ़ गई। डिमांड में इजाफे से यहां छोटे स्टाम्प नहीं मिल रहे हैं। आवेदकों को छोटे स्टाम्प के लिए वेंडरों से लेकर ट्रेजरी ऑफिस तक दौड़ लगानी पड़ रही है। ऐसे में आवेदक न सिर्फ पचास रुपये के स्टाम्प पर हलफनामा बनवाने को मजबूर है, बल्कि इसके एवज में उन्हें अपनी जेबें भी ढीली करनी पड़ रही हैं। विभागीय अफसर भी छोटे स्टाम्पों की कमी होना स्वीकारते हैं, लकिन उनका दावा है कि इस किल्लत के बाद भी जरूरतमंदों को छोटे स्टाम्प काउंटर के जरिए मुहैया कराए जा रहे हैं।

हर महीने 50 हजार की खपत
सीतापुर। मुख्य कोषागार समेत समूचे जिले में हर महीने छोटे स्टाम्प यानी पांच, दस एवं बीस रुपये के स्टाम्पों की तकरीबन पचास हजार रुपये की खपत है। जिला मुख्यालय पर प्रतिमाह करीब 15 हजार रुपए के छोटे स्टांपों की खपत है, जबकि तहसील स्तर पर प्रत्येक उप-कोषागारों में प्रतिमाह करीब 7 से 8 हजार रुपए है। विभिन्न सरकारी योजनाओं के लांच होने से छोटे स्टाम्पों की खपत एकाएक बढ़ गई है। डिमांड बढ़ने से छोटे स्टॉम्पों की किल्लत हो गई।

लखनऊ से आते स्टाम्प
सीतापुर। जिले को विभिन्न स्टाम्प पेपर राजधानी लखनऊ से मिलते हैं। डिमांड के अनुरूप विभिन्न मुद्राओं के स्टाम्प लखनऊ उन्हें मुहैया कराता है। उसे कानपुर जनपद से स्टाम्प मिलते हैं, जबकि कानपुर जनपद को हैदराबाद से स्टाम्पों की आपूर्ति होती है। विभागीय जानकार बताते हैं कि डिमांड के अनुरूप छोटे स्टाम्पों की हैदराबाद से ही आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में इनकी किल्लत बनी हुई है।

पिछले कई दिनों से कलक्ट्रेट परिसर में दस रुपये के स्टाम्प नहीं मिल पा रहे हैं। स्टाम्प पर बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन करना है। इसके लिए कई चक्कर लगा चुके हैं। फार्म न मिलने के कारण मजबूरन 50 रुपए के स्टाम्प पर हलफनामा बनवाना पड़ रहा है। अब हलफनामा बनवाने में अधिक धन खर्च करना पड़ रहा है।
-नारायण, सुजावलपुर

मकान किराए पर लेने के लिए शपथ पत्र बनवाना है, जिसके लिए बीस रुपए के स्टांप की आवश्यकता है। ट्रेजरी ऑफिस से लेकर कलक्ट्रेट परिसर में मौजूद सभी दुकानों पर प्रयास कर चुके हैं। पहले शपथ पत्र बनवाने में करीब 40 रुपए का खर्च आता था, लेकिन अब 80 से 90 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।
-साबिर, महमूदाबाद

पांच, दस व बीस रुपए के स्टाम्पों की जरूरत ज्यादातर सरकारी योजनाओं व शपथ पत्र देने के लिए पड़ती है। इन दिनों गैस कनेक्शनों के सत्यापन में भी दस व बीस रुपए के स्टाम्प लग रहे हैं। लेकिन किल्लत होने से सर्वाधिक दिक्कतें उन लोगों के लिए आ रही है, जो अत्यंत गरीब है। प्रशासन को कोई वैकल्पिक प्रबंध करना चाहिए।
-अनिल सिंह, क्योटीकलां

इनके लिए जरूरत
कन्या विद्या धन
बेरोजगारी भत्ता
राशन कार्ड
शस्त्र लाइसेंस
किरायानामा
वसीयतनामा
पढ़े बेटियां, बढ़े बेटियां
अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना
केवाईसी फार्मों का सत्यापन
विभिन्न सरकारी कार्यों में सत्यापन

यहां मिलते हैं स्टाम्प
कोषागार सीतापुर
उपकोषागार बिसवां
उपकोषागार मिश्रिख
उपकोषागार सिधौली
उपकोषागार महमूदाबाद
उपकोषागार लहरपुर
नई सरकारी योजनाएं लागू होने के बाद एकाएक छोटे स्टाम्पों की खपत बढ़ गई है। डिमांड बढ़ने से स्टाम्पों की किल्लत हो गई। मुख्यालय से छोटे स्टाम्पों की डिमांड की गई है। दो-चार दिन में इस समस्या का समाधान हो जाएगा।
अशोक कुमार त्रिपाठी, वरिष्ठ कोषाधिकारी

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