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सड़क पर हुआ प्रसव, नवजात की मौत

Sitapur Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
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सीतापुर। चिकित्सा कर्मियों ने एक बार फिर मानवता को तार-तार कर दिया। शनिवार को नर्स ने प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को खून की कमी का बहाना बनाकर अस्पताल से लौटा दिया। तीमारदार मिन्नतें करते रहे लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। कुछ देर बाद दोबारा सीएचसी ले जाते समय तहसील कार्यालय के निकट सड़क पर ही प्रसव हो गया। उसने मृत बच्चे को जन्म दिया। सड़क पर प्रसव की जानकारी पाते ही एसडीएम मौके पर पहुंच गए। उन्होंने गंभीर हालत में महिला को सीएचसी में भर्ती कराया है। एसडीएम ने नर्स के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। मामला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिधौली से जुड़ा हुआ है।
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संदना थाना क्षेत्र के ग्राम फतेपुर निवासी विनोद की पत्नी पप्पी (25) शनिवार को प्रसव के लिए सिधौली के सरकारी अस्पताल गई थी। परिजनों की मानें तो ड्यूटी पर तैनात नर्स निशा ने खून की कमी के चलते शरीर में सूजन होने की बात कहकर लौटा दिया। परिजनों ने मिन्नतें की तो सीतापुर या लखनऊ में बेहतर इलाज कराने की सलाह दी। तीमारदार उसे लेकर एक निजी अस्पताल पहुंचे तो यहां भी डॉक्टरों ने भर्ती करने से इनकार कर दिया। परेशान घर वाले वापस सीएचसी जा रहे थे लेकिन अचानक असहनीय पीड़ा होने पर तहसील कार्यालय के निकट सड़क पर ही प्रसव हो गया। उसने एक मृत बच्चे को जन्म दिया। मामले की जानकारी पाकर एसडीएम रमेश चंद्र तिवारी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने महिला को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया। महिला की हालत गंभीर बताई जा रही है।

एसडीएम ने पूरे मामले में परिजनों से बात की। इसके बाद उन्होंने आरोपी नर्स को जमकर फटकारा। स्वास्थ्य अधीक्षक सुरेंद्र कुमार शाही ने बताया कि नर्स के विरुद्घ कार्रवाई के लिए सीएमओ को पत्र लिखा जा रहा है। डॉक्टर सुबीर रस्तोगी का कहना है कि उनकी इमरजेंसी में डयूटी लगी थी, लेकिन नर्स ने मरीज के बारे में उन्हें कुछ भी नहीं बताया। डॉ. सुबीर के मुताबिक पप्पी ने टीकाकरण नहीं कराया था। जांच में उसका हीमोग्लोबिन 4.4 ग्राम निकला था।

सुविधाएं अनेक, फिर भी हो रही लापरवाही
सुविधा व संसाधन होने के बाद भी गर्भवती सड़क पर बच्चों को जन्म दे रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत गर्भवती की देखरेख के लिए स्वास्थ्य विभाग का पूरा सिस्टम तैयार किया गया है। सिस्टम की पहली कड़ी एएनएम व आशा बहू को माना जा रहा है। एएनएम के द्वारा ही गांवों में बच्चों व गर्भवती का टीकाकरण व रक्ताल्पता से बचाने के लिए आयरन व फोलिक एसिड की गोलियां वितरित करने की व्यवस्था है। गर्भवती होने से लेकर सुरक्षित प्रसव कराने तक जिम्मेदारी शासन ने मेडिकल विभाग को दे रखी है। प्रसव के लिए एएनएम व आशा को लगाया गया है। इसके लिए उन्हें शासन स्तर से अतिरिक्त मानदेय दिया जाता है। इसके बावजूद सड़क पर प्रसव हो रहे हैं।

सिधौली एफआरयू पर मौजूद सभी सुविधाएं
सिधौली एफआरयू (फर्स्ट रेफरल यूनिट) को शासन ने हाईटेक कर रखा है। यहां की एफआरयू, प्रदेश की टॉप-10 एफआरयू में से एक मानी जाती है। यहां लैब, एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड की जांच की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। महिला चिकित्सक के साथ-साथ शल्य चिकित्सक, बेहोशी के चिकित्सक तैनात किए गए हैं। इसके अलावा यहां पैरामेडिकल स्टाफ व स्टाफ नर्स व अन्य कर्मचारी भी हैं। यहां चौबीस घंटे इमरजेंसी सेवाएं व एंबुलेंस की सुविधा है। आवश्यकता पड़ने पर रात में सर्जरी के लिए आधुनिक ऑपरेशन थियेटर भी बना हुआ है।

ये है भर्ती कराने का मानक
अस्पताल में रोगी के आते ही चिकित्सक उसका प्रारंभिक परीक्षण कर इलाज शुरू करें। इसके तुरंत बाद पैथालॉजिकल एवं रेडियोलॉजिकल जांच के माध्यम से बीमारी का पता लगाएं। बीमारी का पता चलते ही उसे बचाने के लिए चिकित्सक को हर संभव प्रयास करने चाहिए।

सिधौली प्रकरण की जानकारी मिल गई है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। इसमें जो लोग दोषी पाये जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. एसपी सिंह, सीएमओ

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