फेल हो रही ड्राप बैक सुविधा

Sitapur Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
सीतापुर। एनआरएचएम के तहत संचालित जननी शिशु सुरक्षा योजना का लाभ पात्रों को नहीं मिल पा रहा है। योजना के तहत प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को अस्पताल से वाहन द्वारा घर भेजने की व्यवस्था की गई थी। इसके लिये किराये पर वाहन भी लिए गए। अस्पतालों में एक माह से प्राइवेट वाहन खड़े हुए हैं। वाहन चालकों को आदेश भी दिया गया कि वह निर्धारित अस्पतालों में जाकर सेवाएं देना शुरू करें। लेकिन अस्पताल प्रशासन व चालकों के मध्य सामंजस्य न बन पाने के कारण योजना रुकी हुई है। शासन ने अस्पतालों में प्रसव की संख्या बढ़ाने के लिये जननी शिशु सुरक्षा योजना एक अगस्त 2011 से शुरू की गई। योजना को लहरपुर व सिधौली अस्पताल में शुरू कर दिया गया। वित्तीय वर्ष 2012-2013 में योजना का विस्तारीकरण कर सभी सीएचसी व पीएचसी में लागू करने का शासनादेश जारी कर दिया गया। इसके लिये जनपद स्तर पर टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से किराये पर वाहनों का अनुबंध कर लिया गया और वाहनों को लगभग एक माह पूर्व निर्धारित अस्पतालों में भेज दिया गया। प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को घर छोड़ने के एवज में प्रति केस 250 रुपये का मानक तय किया गया था। प्रसव के बाद महिला को अस्पताल में कम से कम 48 घंटे रोकने की व्यवस्था की गई। सामान्य एवं सीजेरियन डिलेवरी होने पर उसे कंज्यूमेबिल्स तथा औषधियों की व्यवस्था ब्लड ट्रांसफ्यूजन तथा पैथालॉजिकल एवं रेडियोलॉजिकल की जांच मुफ्त में देने की बात कही गई। आवश्यकता पड़ने पर उन्हीं वाहनों से महिला को उच्च स्तरीय अस्पताल भेजने की योजना बनी थी। वाहन का प्रयोग न होने पर वह अस्पताल परिसर में ही रहेगा। इन वाहनों पर दवा की किट में आकस्मिक दर्द निवारक, उल्टी, दस्त, गैस, चोट लगने वाली औषधियां व सेप्टिक लोशन, काटन, बैंडएड आदि उपलब्ध कराने के आदेश हुए थे। लेकिन वाहनों का प्रयोग न होने पर चालकों को न तो दवाओं की किट दी गई न ही उन्हें प्राथमिक उपचार करने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रसव के बाद महिलायें निजी वाहनों से घर जाने को विवश हो रही हैं।

जननी शिशु सुरक्षा योजना का लाभ पात्रों को देने के लिये निर्देश दिए जा चुके हैं। योजना को सही ढंग से संचालन न करने की शिकायतें मिलीं थीं। उनका निस्तारण करवा दिया गया है।
-डॉ. एसके चौहान, एसीएमओ

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