आक्सीजन की कमी पर मत्स्य विभाग ने खींचा खाका

Sitapur Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
सीतापुर। देर से ही सही, मगर मत्स्य महकमा जागा। मिश्रिख के महर्षि दधीचि कुंड में पिछले दो दिन से लगातार आक्सीजन की कमी से मछलियों की मौतें हो रही थीं। इसका संज्ञान लेने के बाद मत्स्य विभाग ने मौका-मुआयना कर वहां पर आक्सीजन कम होने की वजहें तलाशीं और आक्सीजन कमियों की रोकथाम के उपाय सुझाए हैं। साथ ही विभाग ने प्रशासन को अपनी विस्तृत रिपोर्ट भी सौंप दी है।
मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक एके यादव बताते हैं कि मिश्रिख दधीचि कुंड में आक्सीजन की काफी कमी है। वहां पर आक्सीजन के अभाव में पानी की सतह पर काई जम गई है। कुंड की तलहटी में काफी मात्रा में कचरा जमा है। तालाब में आर्गेनिक लोड बढ़ गया है जिससे वहां विषैली गैसें निकल रही हैं। धूप न निकलने के कारण भी पानी में आक्सीजन की कमी हो रही है। वह बताते हैं कि इस पर अंकुश लगाने के लिए वहां पर कृत्रिम आक्सीफ्लोर व आक्सीडस्ट का छिड़काव किया जाना चाहिए। समय-समय पर तालाब में एकत्रित पानी की रिचार्जिंग कराई जानी चाहिए। इसके अलावा तालाब में पानी की उचित मात्रा बनाए रखने की भी आवश्यकता है। मछलियों की ग्रोथ रोकने के लिए जंगली मछलियों को तालाब में छोड़ा जाना चाहिए, क्योंकि यह मछलियां छोटी मछलियों को खाती हैं।

आक्सीजन कमी के लक्षण व कारण
पानी में काई का जमना
मछलियों का बार-बार सतह पर आना
काफी समय तक पानी का स्थिर होना
पानी की तलहटी में कीचड़ का जमा होना
पानी की सांद्रता बढ़ना

आक्सीजन कमी के उपाय
कृत्रिम आक्सीजन के लिए दवाओं का छिड़काव
तालाब में पानी की मात्रा को बढ़ाना
तलहटी की समय-समय पर सफाई
तालाब में वाटर रिचार्जिंग कराई जाय
पानी को अस्थिर बनाने के लिये उपाय करना

जिले में पहले भी चार तालाबों में मर चुकीं मछलियां
सीतापुर। मिश्रिख के महर्षि दधीचि कुंड में मछलियों की मौतें होने का यह कोई नया मामला नहीं। इससे पहले भी जिले में चार तालाबों में भारी मात्रा में मछलियों की मौत हो चुकी हैं। ये सभी घटनाएं पिछले एक साल के अंतराल की हैं। मत्स्य विभाग भले ही इन घटनाओं की कोई वजहें न ढ़ूंढ पाया हो, मगर इससे मछली पालकों को काफी क्षति हुई। इनके अलावा यहां की नदियों में भी कई दफा मछलियों की मौतें हो चुकी हैं। पर लगातार हो रही इन घटनाओं पर कोई लगाम नहीं लग पा रही है। विकास खंड गोंदलामऊ के कोरौना गांव में अहिल्या तालाब में विगत 12 मई 2012 को अज्ञात कारणों से मछलियों की मौत हो गई थी। यहां करीब 12 कुंतल मछलियां मरी थी। यहीं के भारत इंटर कॉलेज के पास के तालाब में माह अगस्त 2012 में 20 कुंतल मछलियों की मौत हो गई थी। वर्ष 2011 में लखनऊ-लखीमपुर हाईवे पर सेठिया ऑयल मिल के निकट एक तालाब में भारी मात्रा में मछलियों की मौतें हुई थी। मत्स्य पालक ने अपनी पाई-पाई जोड़कर तालाब में मछलियों के बीज डाले थे। इससे पहले अक्टूबर माह 2011 में विकास खंड कसमंडा के पेनी तालाब में अज्ञात कारणों से कई कुंतल मछलियों की मौत हो गई थी। विकास खंड हरगांव के बाढ़ गंगा तालाब कई वर्ष पूर्व करीब 20 कुंतल मछलियों की मौत हो गई थी। सभी मौतों के कारण अब तक पता नहीं लग पाये हैं लेकिन मछलियों की मौतों से पालकों को काफी नुकसान पहुंचा था। यही नहीं तालाबों में मछलियों की मौतें होने के साथ-साथ इसी इस वर्ष सिधौली में भी मछलियों की मौत होने का एक मामला सामने आया था। यहां से निकली सराय नदी के कोनी घाट पर सैकड़ों कुंतल मछलियों को मृत अवस्था में पाया गया था।

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