कोनी गांव का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर

Sitapur Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
रेउसा (सीतापुर)। रेउसा क्षेत्र में छह घर घाघरा नदी की कटान में समा गए। लोग पलायन कर सड़कों पर डेरा डाल रहे हैं। कटान से कोनी गांव का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर पहुुंच गया है। सूचना मिलने पर एसडीएम बिसवां ने मौके पर जाकर कटान का मुआयना किया। उधर, बारिश के कारण जलस्तर बढ़ने से कई गांवों में पानी भी घुसना शुरू हो गया है।
रेउसा क्षेत्र की ग्राम पंचायत गोलोककोडर के मजरा कोनी गांव में घाघरा नदी का कटान तेजी पर है। शनिवार रात हुए कटान से कोनी गांव के जिलेराम, माया प्रकाश, राजित राम, रामलाल, अंबिका व जगदीश के मकान नदी में समाहित हो गये। आशियानों के नष्ट होने से ये ग्रामीण पलायन कर कोनी घाट पर डेरा डाले हुए हैं। लगातार कटान के कारण कोनी गांव में अब मात्र चार घर ही शेष बचे हैं, वे भी कटने के कगार पर हैं। सूचना पर एसडीएम बिसवां मृत्युंजय राम ने मौके पर जाकर कटान पीड़ितों को गृह अनुदान के रूप में 2500 रुपये की चेक वितरित की और जमीन मुहैया कराने का आश्वासन दिया है। बारिश व बैराजों से छोड़े जा रहे पानी के कारण घाघरा नदी का जलस्तर तेजी के साथ बढ़ रहा है। नदियां उफनाने के कारण क्षेत्र के नगीनापुरवा, पासिनपुरवा, श्यामनगर, चंद्रभाल पुरवा, जंगल टपरी गांवों में पानी घुसने लगा है। पानी बढता देख ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है।
उधर रामपुर मथुरा क्षेत्र में घाघरा नदी का जलस्तर तेजी के साथ बढ़ने लगा है। नदी में कटान भी तेज हो गई है। रामपुर मथुरा से अंगरौरा जाने वाले मुख्य मार्ग के नदी में समाहित हो जाने के कारण आवागमन बाधित हो गया है। उधर अंगरौरा व बाढ़ूपुरवा गांव के किसानों की 60 बीघा कृषि योग्य जमीन भी नदी में समा गई है। क्षेत्र में कई लोगों के घर कटान के मुहाने पर पहुंच गये हैं।
विकास खंड रामपुर मथुरा के कई गांवों पर बाढ़ का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। यहां घाघरा नदी का जलस्तर बारिश के कारण तेजी के साथ बढ़ रहा है। क्षेत्र में कई स्थानों पर कटान भी तेजी से हो रही है। शनिवार की रात रामपुर मथुरा से अंगरौरा जाने वाला मुख्य मार्ग कट गया है। इससे करीब आधा दर्जन से अधिक गांवों का आवागमन प्रभावित हो गया है। इन गांवों में अंगरौरा व उसके आठ मजरों के अलावा विक्रमपुरवा और दुबेपुरवा गांव भी शामिल हैं। कटान के कारण क्षेत्र में करीब 60 बीघा जमीन व उन पर खड़ी फसल नदी में समा गई है। इनमें अंगरौरा गांव के जगजीवन, जुगुल किशोर, सोमनाथ, भगवानदीन, विश्वनाथ, अंबर व मिश्रिलाल की 25 बीघा जमीन व बाढ़ूपुरवा मजरा भागवतपुर के दुलारे, कन्हैया, भारत, विनोद, बाढ़ू व रामपति समेत अन्य लोगों की करीब 35 बीघा कृषि योग्य भूमि शामिल है। इसके अतिरिक्त लगातार हो रही कटान के कारण बाढ़ूपुरवा के बहादुर, तेजू व फुलारे के घर कटान की कगार पर हैं। ये लोग अपने घरों को खाली कर सुरक्षित स्थान की ओर पलायन कर गए हैं। अब तक बाढ़ व कटान पीड़ित इन ग्रामीणों को प्रशासन द्वारा कोई ठोस मदद मुहैया नहीं कराई जा सकी है।

नाव बनाने का काम तेज
जहांगीराबाद । नदियों के जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी के बाद गांजर क्षेत्र के लोग सहमें हुए हैं। बाढ़ की आशंका से लोग तैयारियों में जुटे गए हैं। तराई इलाके में नाव बनाने का काम तेज हो गया है। बाढ़ में टापू बन जाने वाले गांवों के लोगों ने डोंगियां व नावों को बनाने का काम शुरू कर दिया है। पिछले दो दिनों से हो रही बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण शारदा व उससे निकली किवानी नदी का जलस्तर बढ़ गया है। किवानी नदी का पानी जहांगीराबाद सहित निकटवर्ती गांव बजेहरा, सोहरवा, भंभुवा गांवों में प्रवेश करने लगा है। पांच वर्षों से लगातार बाढ़ की विभीषिका झेल रहे ग्रामीण लकड़ी, लोहा आदि की व्यवस्था कर नावें बनाने और पुरानी नावों की मरम्मत में जुट गये हैं। मालूम हो कि किवानी नदी के आस-पास बसे, भंभुवा, विलखा, अमिरती, बसहिया कोठार, पल्हरी, बड़ईडही, आमगौरिया, रेवनिया, निघतिया, सरैंय्या, गोधनी, राई, बसुदहा, देवरिया, टेढ़ी पुरवा, त्रिलोकपुर, पठाननपुरवा सहित दर्जनों गांव बाढ़ में टापू बन जाते हैं। सभी रास्तों पर 4-5 फीट ऊंचा पानी भर जाता है। लोगों को मात्र इन्ही डोंगियों व नावों का सहारा लेना पड़ता है।


अव तक 1500 सौ बीघा से अधिक जमीन कटान में समाई
भदफर (सीतापुर)। गांजर की शारदा नदी ने सैकड़ों बीघे जमीन फसल समेत निगल लिया है। पीड़ित किसानों को अभी तक किसी तरह की सहायता प्रशासन द्वारा सहायता नहीं उपलब्ध गई है। भदफर इलाके के गांवों में अब तक करीब 1500 बीधे से 2000 बीघे कृषि योग्य भूमि कट चुकी है। सोंसरी के किसानों की लगभग 500 बीघा, सेमरिया में लगभग 300 बीघा, खालेपुरवा की लगभग 200 बीघा, मंझरी की लगभग 100 बीघा, टिकौना की लगभग 500 बीघा, पट्टी की लगभग 200 बीघा व रतौली की लगभग 200 बीघा जमीन फसल सहित कट चुकी है। तबाह हुए किसानों का हाल चाल लेने अभी तक कोई अधिकारी मौके पर पर नहीं पहुंचा है। किसान महेंद्र दत्त, रमेश, दिनेश, रामेश्वर, पुत्ती, परमेश, कमलेश, कमलचंद्र, सोहन लाल, शिव कुमार, विनोद, राम प्रताप, अनूप, प्रभात, जितेंद्र, राज कुमार आदि किसानों का कहना है कि हम लोग भूखमरी की कगार पर पहुंच गये है।

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