फिर बढ़ा नदियों का जलस्तर, लोग सहमे

Sitapur Updated Fri, 31 Aug 2012 12:00 PM IST
सीतापुर। बुधवार की रात हुई बारिश से जिले की नदियां उफना गई हैं। जलस्तर में बढ़ोतरी के बाद तटवर्ती गावों, विशेष रूप से गांजरी क्षेत्र के लोग सहम गए हैं। गांजरी इलाके में कहर ढाने वाली चौका और घाघरा नदियों के जलस्तर में पिछले चौबीस घंटों के दौरान पांच-पांच सेमी की बढ़ोतरी हुई हैं। शहर के बीचो बीच से बहने वाली सरायन नदी के जलस्तर में पिछले चौबीस घंटाें के दौरान सर्वाधिक 25 सेमी की वृद्धि हुई है। उधर गोमती नदी के जलस्तर में भी दो सेमी की वृद्धि दर्ज की गई है। बुधवार की रात सीतापुर में 6 मिमी. वर्षा रिकार्ड की गई।
महमूदाबाद बांध केजल स्तर में पिछले एक सप्ताह के दौरान कोई कमी अथवा वृद्धि दर्ज नहीं की गई है। बनवसा और गिरिजा बैराजों का जलस्तर पिछले चौबीस घंटों से ठहरा हुआ है। शारदा बैराज के जलस्तर में बुधवार के मुकाबले गुरुवार को पांच सेमी की वृद्धि दर्ज की गई है। गुरुवार को सरायन नदी का जलस्तर 126.20 मीटर, गोमती नदी का जलस्तर 118.60 मीटर, चौका नदी का जलस्तर 118.70 मीटर तथा घाघरा नदी का जलस्तर 118.50 मीटर रिकार्ड किया गया। इसके अलावा चौका नदी पर बने महमूदाबाद बांध के जलस्तर में बीते एक सप्ताह से कोई बदलाव नहीं आया है। इसका जलस्तर अभी भी 116.50 मीटर पर ठहरा हुआ है। उधर बनवसा और गिरिजा बैराज के जलस्तर में पिछले चौबीस घंटों के दौरान किसी भी तरह का बदलाव नहीं हुआ है। इन दोनों बैराजों का जलस्तर क्रमश: 219.45 और 135.00 मीटर पर ठहरा हुआ है। शारदा बैराज के जलस्तर में पांच सेमी की वृद्धि के बाद गुरुवार को इस बैराज का जलस्तर 134.20 मी. रिकार्ड किया गया।

बैराजों से छोड़ा गया 1.85 लाख क्यूसेक पानी
बैराजों से जिले की नदियों में कुल एक लाख 69 हजार 507 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। वनवसा बैराज से 37 हजार 711 क्यूसेक, शारदा बैराज से सोलह हजार 669 क्यूसेक तथा गिरिजा बैराज में एक लाख पंद्रह हजार 127 क्यूसेक पानी जिले में बहने वाली नदियों में छोड़ा गया है।

घाघरा में समाए छह और मकान
रामपुर मथुरा (सीतापुर)। जिले के रामपुर मथुरा विकास खंड क्षेत्र में घाघरा ने तबाही मचानी शुरू कर दी है। नदी की जलधारा से छह मकान कट गये हैं। दर्जनों कटने की कगार पर हैं। दो दिनों तक इसी तरह से कटान का सिलसिला जारी रहा तो समूचा गांव घाघरा में समाहित हो सकता है। कटान से प्रभावित आठ परिवार घर गृहस्थी के साथ अपने घरों से पलायन कर सरकारी स्कूल में डेरा जमाए हुए हैं। विकास खंड क्षेत्र के शुकुलपुरवा के भागवत पुरवा गांव के निवासी दुजई, कमला, नारायण व रामायण के घर घाघरा नदी में कट गये हैं, जबकि बाबूपुरवा गांव के दुलारे, रामपति, सुरेंद्र, कन्हैया, सदगुरु, तेजू, भारत, विनोद के घर कटने की कगार पर हैं। कटान अगर दो दिनों तक इसी तरह से जारी रही तो पूरा गांव घाघरा में समा सकता है। गांव के दुलारे, सुरेंद्र, कन्हैया, तेजू आदि आठ परिवार घर गृहस्थी के साथ अपने घरों से पलायन कर प्राथमिक विद्यालय शुकुलपुरवा में रह रहे हैं। क्षेत्र के ही अंगरौरा गांव के निवासी भगवानदीन व रामदीन के घर भी घाघरा नदी की जलधारा से कट चुके हैं। गांव के दुख हरन, शोभित, चेतई, सेवारन, चंदर, मेवा, मिश्री लाल के घर भी कटान की कगार पर पहुंच गये हैं। इन ग्रामीणों का कहना है कि अब उनके सामने घरों से पलायन करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। अभी तक कटान प्रभावित गांवों में तहसील प्रशासन का कोई भी अधिकारी व कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा है।

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