सावधान! कहीं डेंगू न ले ले आप की जान

Sitapur Updated Thu, 30 Aug 2012 12:00 PM IST
सीतापुर। बदलते मौसम में बीमारियों को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। तेजी से पैर पसार रहा डेंगू कभी भी चपेट में ले सकता है। इसलिए जरूरी है कि बचाव के उपाय किए जाएं और बीमारी के लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज कराया जाए।
संक्रामक रोग डेंगू तेजी से पैर पसार रहा है। वाइरस जनित यह बीमारी एडीज एजिप्टाई व एल्बोपिक्टस नामक मच्छर से फैलती है। यह मच्छर ठहरे पानी में पनपते हैं। मच्छर के काटने से रोग प्रतिरोधक तंत्र प्रभावित होता है। इससे बुखार के साथ-साथ शरीर पर लाल चकत्ते पड़ने लगते हैं। प्लेट्लेट्स अचानक तेजी से कम होने लगती हैं। बुखार 105 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुंच जाता है। बीमारी जब गंभीर रूप धारण कर लेती है, तो डेंगू हेमोरेजिक बुखार तथा डेंगू शॉक सिन्ड्रोम नाम से जानी जाती है। पूर्व एसीएमओ डॉ. शरद चन्द्रा कहते हैं कि डेंगू रोग से प्लेटलेट्स काउन्ट जब बीस हजार से कम हो जाता है, तब रोगी की जान को खतरा उत्पन्न हो जाता है। जब रोगी खाना पीना बंद कर देता है, तो रोगी को आईवी फ्लुड दिया जाता है। रोग होने के तीसरे दिन से नियमित प्रत्येक दिन प्लेट्लेटस काउन्ट की जाती हैं। जब यह काउन्ट साठ हजार के ऊपर हो जाता है। तब तक रोगी को सघन कक्ष इकाई में रख कर इलाज किया जाता है। उनका कहना है कि रोगी को एस्प्रिन, कार्टीसोन, आईबूप्रोफेन, डोपामीन औषाधियों का प्रयोग नहीं करना चाहिए, यह प्राणघातक हो सकती हैं।

रोग के लक्षण
- तेज बुखार के साथ सिर में असहनीय दर्द
- हड्डियों के जोड़ों एवं मांसपेशियों में दर्द
- मतली के साथ उल्टी होना
- तीन से चार दिनों में शरीर पर लाल चकत्ते पड़ना
- लिम्फ एवं ब्लड वेसल्स का क्षतिग्रस्त होना
- नाक एवं मसूड़ों से रक्त का स्राव

बचाव के उपाय
- घर एवं आस-पास के गड्ढाें एवं कबाड़ के सामानों में पानी न रहने दें
- पानी हटाना संभव न हो तो प्रति दिन मिट्टी क ा तेल छिड़क दें
- कूलर, टंकी, गमलों में नियमित पानी बदलें
- सोते समय मच्छर दानी का प्रयोग करें
- रोग फैलने की दशा में कीट नाशकों का छिड़काव करवाएं
- मैलाथियान के छिड़काव के दैारान कमरों के खिड़की दरवाजे खोल दें
- दिन में पूरे शरीर को कपड़ाें से ढक कर रखें
- डीडीटी का छिड़काव खुद लेकर घर के आस-पास करें

यह ना करें
- घर में लगे सजावटी पौधों के गमलों में पानी लंबे समय तक नहीं रहना चाहिए
- घर व आस-पास कबाड़ का सामान न रखें
- जानवराें एवं कपड़ा धोने वाले बर्तनों में पानी न रहने दें
- अचानक बीमार होने पर स्वत: किसी प्रकार की दवा न लें

‘संक्रामक रोगों पर नियंत्रण के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मच्छर रोधी कीट नाशकों का छिड़काव किया जा रहा है। संक्रामक नियंत्रण टीम बराबर संक्रामक रोगों पर निगरानी रख रही है।
डॉ. एसके चौहान, एसीएमओ’

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