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गांजर के बाशिंदों ने ली राहत की सांस

Sitapur Updated Fri, 24 Aug 2012 12:00 PM IST
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सीतापुर। बैराजों से पानी छोड़े जाने के बाद भी जिले के गांजरी इलाके में तांडव मचाने वाली चौका और घाघरा नदियों के जल स्तर में पिछले चौबीस घंटों के दौरान पांच-पांच सेमी की कमी दर्ज की गई है। इससे यहां के बांशिदों ने चैन की सांस ली है। हालांकि शहर के बीचोंबीच बहने वाली सरायन के जल स्तर में पांच सेमी की वृद्धि हुई है। उधर गोमती नदी के जल स्तर में पिछले चौबीस घंटों में कोई भी बदलाव नहीं आया है। बुधवार को सीतापुर के शहरी इलाके में 40 मिमी और नीमसार में 15 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा शारदा और गिरिजा बैराजों के जल स्तर में पिछले चौबीस घंटों के दौरान आंशिक कमी दर्ज की गई है। जबकि बनवसा बैराज के जल स्तर में पिछले चौबीस घंटों के दौरान पांच सेमी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। गुरुवार को गोमती में 118.08 सेमी, सरायन में 125.85 सेमी, चौका महमूदाबाद बांध में 116.50 सेमी, चौका कनरखी में 119.10 एवं घाघरा अंगरौरा में 118.90 सेमी जलस्तर था। इसके अलावा विभिन्न बैराजों से जिले की नदियों में कुल 2.24 लाख क्यूसेक से अधिक पानी डिस्चार्ज किया गया। वनवसा बैराज से 70 हजार 840 क्यूसेक, शारदा बैराज से 30ै हजार 958 क्यूसेक तथा गिरिजा बैराज में एक लाख 23 हजार 073 क्यूसेक पानी जिले में बहने वाली नदियों में छोड़ा गया है।
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प्रशासनिक मदद से वंचित हैं बाढ़ पीड़ित
भदफर (सीतापुर)। लहरपुर तहसील क्षेत्र में शारदा नदी अपने उफान पर है। कटान के कारण लोग पलायन कर सड़कों पर डेरा डालने को मजबूर है। बुधवार की शाम से अब तक क्षेत्र के कुल दस घर नदी में समां चुके है। अब तक क्षेत्र की सैकड़ों बीघा खेती योग्य जमीन कट चुकी है। लेकिन अब तक प्रशासन द्वारा मदद के नाम पर कोई कदम नही उठाया गया है। तहसील लहरपुर इलाके के टिकौना में शारदा नदी की कटान जोरों पर है। पिछले 24 घंटों में कटान के कारण गांव के कृष्णाकांत, दलीप, शंभू, राजू, राजकुमार, हरिकिशन, भानू, अवधेश, रामसिंह व श्रीदेवी के घर नदियों में समां चुके है। इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायत में बना प्राथमिक विद्यालय भी कटान की कगार पर पहुंच गया है। एक सप्ताह से टिकौना गांव में नदी कटान कर रही है। किसान गांव छोड़कर सड़कों पर डेरा जमा रहे हैं। गांव से पलायन कर बहराइच जाने वाले मार्ग पर झोपड़ी डालकर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। उधर ग्राम पंचायत सोनसरी में भी खेती योग्य भूमि की कटान जोरों पर है। अब तक क्षेत्र में करीब सौ बीघा जमीन नदी में समां चुकी है। इनमें गांव के सोहनलाल, रामहेत, संजय, महेंद्र, दिनेश, रमेश, कमलचंद, मुनीम, परमेशचंद्र, श्याम बिहारी, कमलेश, पट्टे व रामेश्वर की जमीनें शामिल हैं। गांव में अभी बीमारी फैलने का मामला सामने नहीं आया है। पीड़ितों को प्रशासनिक सहायता अभी तक नहीं दी जा सकी है।

बाढ़ प्रभावित गांवों में स्थिति सामान्य
रेउसा (सीतापुर)। बाढ़ प्रभावित रेउसा विकास खंड में बहने वाली घाघरा और चौका नदियों के जल स्तर में गिरावट से इन नदियों की तट पर बसे ग्रामीणों ने थोड़ी राहत जरूर महसूस की है। मंगलवार की रात ब्लाक क्षेत्र के नगीनापुरवा, श्यामनगर, चंद्रभाल पुरवा और सिसईया बाजार में उफनाई घाघरा नदी का पानी प्रवेश कर गया है। इससे इन गांवों में रहने वाले लोग सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन करने लगे थे। लेकिन गुरुवार को इन दोनों नदियाें के खामोश रहने से ग्रामीणों को एक बार आशा बंधी हैं कि शायद अब गांव में और तबाही न होे। नदियों के जल स्तर में कमी होने से इलाके के काशीपुर, गोड़ियन पुरवा, असईपुर, बाजपेयीपुरवा, असईपुर, चमारनपुरवा, मटेरिया, खमहरिया, शेखपुर, मल्लापुर, कोनी, नगीनापुरवा, श्यामनगर, चंद्रभाल पुरवा और सिसईया बाजार आदि गांवों में स्थिति सामान्य बनी हुई है। आहिस्ता-आहिस्ता लोग अपने घर को लौट रहे हैैं।

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