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रुपये निकाले पर नहीं बनवाए 50 शौचालय

Lucknow Bureauलखनऊ ब्यूरो Updated Sat, 15 Feb 2020 11:51 PM IST
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इमलिया सुल्तानपुर (सीतापुर)। डीसी मनरेगा ने ग्रामसभा गोड़वा साहबगंज की जांच की, इस दौरान तमाम अनियमितताएं पाई गईं। 50 शौचालय ग्राम निधि के खाते से धनराशि निकालने के बावजूद नहीं बनवाए गए। छह लाख का गबन प्रधान व सचिव ने किया। विकास मद के तीन लाख की चेक सचिव व प्रधान ने खुद काट ली। धनराशि दुरुपयोग मिलने पर कार्रवाई के लिए जांच रिपोर्ट डीएम को भेजी गई है।
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ब्लॉक एलिया की ग्रामसभा गोड़वा साहबगंज में पूर्व सचिव एवं प्रधान ने मिलकर गांव का विकास कराने एवं शौचालय बनवाने के लिए प्राप्त धनराशि का दुरुपयोग/गबन किया है। डीसी मनरेगा की जांच में पाया गया कि शौचालय निर्माण के लिए आठ लाख 16 हजार रुपए निकाले गए। इससे केवल 18 शौचालय बनवाकर दो लाख 16 हजार का खर्च किया गया। शेष छह लाख रुपए का गबन/ दुरुपयोग किया गया।
शासन की महत्वपूर्ण योजना से 50 लाभार्थियों को वंचित करते हुए अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही की गई। जिसके लिए प्रधान एवं तत्कालीन सचिव दोषी हैं। ग्राम निधि एक के तहत प्राप्त धनराशि से कराए कार्यों के संबंध में वर्तमान सचिव ने बताया कि पूर्व मेें तैनात सचिव द्वारा उन्हें ग्राम पंचायत का कोई भी अभिलेख चार्ज में नहीं दिया गया, इसी कारण निकाली गई।
धनराशि से कौन-कौन से काम हुए उसकी जानकारी नहीं है। बैंक स्टेटमेंट के अनुसार जुलाई 2018 से मार्च 2019 तक 15 लाख 30 हजार 434 रुपए ग्राम निधि से निकाले गए। जिसमें एक लाख 67 हजार की चेक स्वयं तत्कालीन सचिव के नाम से एवं एक लाख 24 हजार तीन सौ की चेक ग्रामप्रधान के नाम वित्तीय नियमों का उल्लंघन करते हुए काटी गई। शेष चेक महिमा ट्रेडर्स एवं श्याम बीर व अन्य के नाम से काटी गई हैं।
शौचालय की धनराशि भेजने के लिए प्रधान ने चेक पर नहीं किए हस्ताक्षर
एलओबी के तहत 60 शौचालय की धनराशि बीते साल जुलाई माह में प्राप्त हुई। वर्तमान सचिव द्वारा 26 लाभार्थियों की बैंक एडवाइजरी तैयार करते हुए लाभार्थियों के खाते में धनराशि भेजने के लिए एक लाख 56 हजार की प्रथम किश्त की चेक 16 सितंबर को तैयार कर प्रधान के समक्ष हस्ताक्षर के लिए प्रस्तुत किया। लेकिन प्रधान ने चेकों पर हस्ताक्षर नहीं किया।
सचिव द्वारा बताया गया कि चेक पर प्रधान के हस्ताक्षर कराने के लिए एडीओ पंचायत को दी गई थी। वह भी चेकों पर हस्ताक्षर नही करा पाए। जिसके कारण 60 शौचालय की धनराशि ग्रामनिधि में अप्रयुक्त पड़ी है। धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद प्रधान द्वारा चेकों पर हस्ताक्षर न करना, जानबूझकर लाभार्थियों की धनराशि न देते हुए एक प्रकार से उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। इसके लिए जांच अधिकारी ने प्रधान को दोषी ठहराया है।
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