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चार बीएसए के नाम, जांच एक पर भी नहीं

Gorakhpur Bureauगोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 20 Jul 2019 11:00 PM IST
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चार बीएसए के नाम, जांच एक पर भी नहीं
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56 शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद विभाग साध लिया चुप्पी
28 शिक्षकों को तीन बार भेजा जा चुका है नोटिस
सत्यापन में डिग्री पर भी उठ चुके हैं सवाल
विभाग की शह पर एक लिपिक ने कर दिया गोलमाल
नीरज मिश्र
सिद्धार्थनगर। 56 शिक्षकों की बर्खास्तगी के बाद चर्चा में आए शिक्षा विभाग की जांच अब बंद हो चुकी है। 28 शिक्षकों को तीन बार नोटिस भेजा गया। उनकी डिग्री भी सत्यापित करने के लिए भेजी गई, जिसमें यह सामने भी आ चुकी है कि सभी डिग्री फर्जी हैं। इसके बाद भी विभाग ऐसे शिक्षकों पर रहमो करम बरसाए हुए है। इतना ही नहीं, शिक्षक माफिया राकेश सिंह की गिरफ्तारी के बाद जिन चार बीएसए के नाम सामने आए थे, उन तक न तो एसटीएफ पहुंच पाई और न ही पुलिस महकमा। ऐसे में फर्जी शिक्षक आराम से नौकरी कर रहे हैं।
2016 के जुलाई माह में सरकार की तरफ से 16448 पदों के लिए नियुक्ति प्रदेश भर में हुई थी। इसी क्रम में जिले में भी 600 से अधिक शिक्षकों ने नियुक्ति हुई थी। इस बीच कुछ अभ्यर्थियों ने मामले की शिकायत करते हुए 100 से अधिक फर्जी शिक्षकों के नाम भी बताए। उस आधार पर जांच हुई तो विभाग ने काफी दबाव के बाद 56 शिक्षकों को किसी तरह बर्खास्त किया। इसके बाद जांच तेज हुई तो एसटीएफ ने गोरखपुर से शिक्षक माफिया राकेश सिंह और बीएसए कार्यालय में तैनात रहे लिपिक धर्मेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। गिरफ्तारी के बाद चार बीएसए के नाम भी सामने आए थे। लेकिन उनके खिलाफ जांच की फाइलें पूरी तरह से बंद पड़ी है। जबकि सूत्र बताते हैं कि शिक्षक माफिया का 2010 से लेकर अब तक जितने भी बीएसए रहे हैं, सबसे उसके गठजोड़ बेहद मजबूत रहा है।
यही वजह है कि उसने मनचाहे लोगों को फर्जी तरीके से नौकरी दिलाई और सत्यापन के समय बीएसए ने उन शिक्षकों की मदद भी की। इतना ही नहीं, उनके वेतन बनाने के नाम पर संबंधित पटल का लिपिक और बीएसए हर महीने उनसे अच्छी खासी रकम भी लेते थे। एसटीएफ के इंस्पेक्टर एसपी सिंह ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद जांच की जिम्मेदारी संबंधित थाने की थी। इसके बाद भी लगातार टीम जांच करते हुए कार्रवाई भी कर रही है। मामले में देवरिया से भी फर्जी शिक्षकों को गिरफ्तार किया गया है।
बाउ साहब के नाम से पुकारते थे बीएसए
जांच के क्रम में यह बात सामने आई थी कि शिक्षक माफिया को कोई भी बीएसए नाम से नहीं पुकारता था। उसे सभी बीएसए बाऊ साहब के नाम से पुकारते थे। उसका सिक्का पूर्व की सरकारों में ऐसा था कि जब चाहता था और जिसे चहता था उसे बीएसए बनवाता था।
चार फर्जी शिक्षक जिले में है तैनात
देवरिया में 18 जुलाई को पकड़े गए दो फर्जी शिक्षकों ने पूछताछ में चार नाम बताए हैं, जो मौजूदा समय में जिले में तैनात है। इन शिक्षकों में जीवन सिंह, धर्मेंद्र यादव, बृजकिशोर यादव और संपत यादव है। इनकी टेंट की डिग्री फर्जी है। इसी डिग्री के आधार पर यह जिले में नौकरी कर रहे हैं। लेकिन विभाग इन पर परदा डाले हुए है।
28 शिक्षकों की डिग्री भी फर्जी
2013 में सरकार ने 10 हजार की वैकेंसी निकाली थी। लेेकिन मामला कोर्ट में चला गया था। इसके बाद किसी तरह 2017-18 में 31 शिक्षकों की नियुक्ति हुई। लेकिन इनमें 28 फर्जी शिक्षकों की डिग्री पर सवाल उठे। इस पर विभाग ने इन्हें तीन बार नोटिस दिया। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद सत्यापन के लिए फाइल गई। सत्यापन में यह पुष्ट हो चुका है कि डिग्री फर्जी है। लेकिन विभाग और संबंधित पटल के लिपिक अब इन शिक्षकों को बचाने में जुटे हुए हैं।
शिक्षक खबर जोड़
एसपी डॉ धर्मबीर सिंह ने बताया कि पूछताछ में शिक्षक माफिया ने कुछ बीएसए के नाम बताए थे। मामले की तफ्तीश की जा रही है। जल्द ही पुलिस कई राज खोलेगी।
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