...तो बरसात साथ लेकर आएगी मुसीबत

Siddhartha nagar Updated Thu, 21 Nov 2013 05:40 AM IST
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सिद्धार्थनगर। पिछले दिनों देश की राजधानी में अप्रत्याशित रूप से कुहासा छाया तो सब चौंक उठे। वैज्ञानिकों की ओर से बात सामने आई कि यह सब पंजाब में खेतों में जलाई गई डंठलों का दुष्परिणाम है। वायुमंडल को पलीता लगा रही खेतों में धधकती डंठलों की आग आगे और भी त्रासदी परिणाम ला सकती है। पर्यावरण के जानकारों का मानना है कि अगर यह ज्वाला ठंडी नहीं पड़ी तो बादल तेजाब बरसा कर आफत का सबब बन सकते हैं।
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बात थोड़ी चौंकाने वाली है, मगर है वैज्ञानिक तर्कों पर आधारित। डंठल जलाने की बुराई पर अंकुश लगाने की पैरवी करते हुए शोहरतगढ़ इन्वायरमेंटल सोसायटी के सचिव एवं शिवपति महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो.बीसी श्रीवास्तव कहते हैं कि बड़े पैमाने पर खेतों में दहक रही डंठल कभी भी मुसीबत का रूप ले सकती है। इसके जलने से उठने वाले धुएं के साथ कई गैसें वायुमंडल में पहुंच रही हैं। इनका वायुमंडल पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन और सल्फर जैसे तत्व जलकर आक्साइड बना लेते हैं। ये वायुमंडल से नमी सोखकर एचएनओ-3, एचएनओ-2, एच-2 एसओ-3, एच-2 एसओ-4 जैसे अम्ल बना लेते हैं।
प्रो. बीसी श्रीवास्तव बताते हैं कि यदि भारी मात्रा में डंठल जलेगी तो काफी मात्रा में ये गैसें वायुमंडल में पहुंचेंगी। जो कभी भी उमड़ते-घुमड़ते बादलों से मिलकर तेजाब के रूप में बरसकर लोगों के लिए मुसीबत बन सकती हैं। अम्लीय वर्षा का न सिर्फ खेती-किसानी पर बुरा असर पड़ेगा बल्कि मानव स्वास्थ्य भी इससे प्रभावित होगा। इसलिए इसे लेकर अब हमें चेतना होगा।
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