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टूटे शीशे वाली बसों में यात्रा मुश्किल

Siddhartha nagar Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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सिद्धार्थनगर। बीते दस दिन से ट्रेन संचलन एवं ठंड के चलते यात्री अब रोडवेज बसों से दूर जा रहे हैं। पहले उन्हें मजबूरी में रोडवेज की खटारा बसों से यात्रा करना पड़ता था। जिन बसों में कभी यात्रियों को सीटें नसीब नहीं होती थी वह अब कम सवारियों के साथ रवाना होती दिखाई दे रही हैं। यात्रियों की मानें तो ठंड में टूटे शीशे में सफर करने से बेहतर है कि कम खर्च में सुरक्षित रेल सफर किया जाए। बहरहाल जो भी हो रेल संचलन एवं ठंड का विपरीत प्रभाव रोडवेज की आय पर पड़ा है।
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विदित हो कि ट्रेन की सुविधा न होने के कारण घंटों यात्रियों को रोडवेज बस की प्रतीक्षा करनी पड़ती थी। यहीनहीं सीट पाने के लिए धक्का मुक्की झेलना भी यात्रियों की विवशता बन गई थी। यही नहीं शीतलहर के कारण दुर्घटना की भी संभावना बढ़ जाती है। रेल सुविधा होने के कारण अब रोडवेज परिसर में यात्रियों की संख्या कम हो गई है। रेल प्रशासन को धन्यवाद देते हुए सूरज जायसवाल ने कहा कि इसका सीधा फायदा छात्र एवं व्यापारी वर्ग को मिला है। पवन जायसवाल का कहना है कि बसों के शीशे व सीटों की खराब स्थिति और ठंड के कारण बसों से यात्रा करना मुश्किल है। वैसे भी अब ट्रेन की सुविधा होने से कम खर्च में यात्रा हो जा रही है। मोहम्मद सरवर खान का कहना है कि परिवहन विभाग को बसों के मरम्मत के साथ ही यात्रियों की सुविधाओं को लेकर गंभीर होने की जरूरत है।
इस संबंध में एआरएम रोडवेज एनके चौधरी ने बताया कि ट्रेन के चलने से यात्रियों की संख्या में कमी हुई है।

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