फिर गरमाया जलकुंडी परियोजना मुद्दा

Siddhartha nagar Updated Fri, 14 Dec 2012 05:30 AM IST
सिद्धार्थनगर। जिले की महत्वपूर्ण जलकुंडी परियोजना का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। राष्ट्रीय छात्र संगठन के मंगेश दूबे ने जिले को बाढ़ की विभीषिका से बचाने वाली इस परियोजना को शुरू करवाने के लिए प्रधानमंत्री सहित पूर्वांचल के सांसदों को पत्र लिखा है। इस पत्र का हवाला देते हुए इस संबंध में श्रावस्ती के सांसद ने भी प्रधानमंत्री को पत्र भेजा है। लगभग 58 वर्ष पूर्व इस परियोजना की आधारशिला रखी गई थी। बावजूद इसके अब तक यह परियोजना सरकार के ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है।
वर्ष 1954 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और नेपाल के राजा त्रिभुवन वीर विक्रम शाह ने महत्वपूर्ण जलकुं डी परियोजना की नींव रखी थी। परियोजना नेपाल के पहाड़ों से निकलने वाली नदियों के जल पर केंद्रित थी, जिसके तहत नेपाल के भालूवांग स्थान के निकट 56 मीटर और नागौरी के पास 163 मीटर ऊंची बांध बनाई जानी थी, जिससे नेपाल से निकली राप्ती और उसकी सहायक नदियों झिरमुख तथा खोला का संगम हो सके। इनके जल को संचित करने के लिए दो बड़े जलाशयों का निर्माण होना था, जिससे विद्युत निर्माण किया जा सके। इस परियोजना का उद्देश्य महज बिजली पैदा करना ही नहीं था, वरन नेपाल से निकलने वाली नदियों का वेग भी कम करना था। नदी के वेग को कम करने के लिए दो बांधों के निर्माण की योजना थी। अगर उस समय इस परियोजना पर काम शुरू होता तो 34 करोड़ रुपये में कार्ययोजना पूरी हो जाती, लेकिन 58 वर्ष का समय बीतने के बाद भी यह परियोजना पूर्ण नहीं हो सकी। परियोजना की फाइल सरकार के ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। अगर यह परियोजना पूरी हो जाती तो इस जनपद सहित बस्ती, गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बलरामपुर श्रावस्ती, संतकबीरनगर जिले को बाढ़ की विभिषिका से काफी हद तक राहत मिल जाती।

केंद्र सरकार परियोजना के प्रति उदासीन
भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र मणि त्रिपाठी का कहना है कि भारत-नेपाल के बीच शुरू हुई जलकुंडी परियोजना केंद्र सरकार की उदासीनता की शिकार है। केंद्र में इस समय कांग्रेस की सरकार है और इस परियोजना का शुभारंभ देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने किया था। सरकार का यह नैतिक दायित्व था। इसे निभाने में केंद्र सरकार विफल है।

विकास में भी घुस गई है राजनीति
फ्यूचर इंडिया आफ के संस्थापक मजहर आजाद का कहना है कि विकास कार्यों में भी राजनीति घुस गई है। इस कारण आज राजनेता निजी फायदे के लिए विकास की घोषणाएं कर रहे हैं। जलकुंडी परियोजना पर काम न होने का कारण भी राजनीति है। अगर जलकुंडी परियोजना शुरू हो जाती तो बाढ़ की विभिषिका से बचाने का लालीपाप लोग नहीं दे पाते और बाढ़ बचाव के नाम पर आने वाली राशि से कमीशन भी नहीं ऐंठ पाते।

अब तक भेजे तीन दर्जन से अधिक पत्र
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के प्रदेश पदाधिकारी मंगेश दूबे का कहना है कि वह इस परियोजना को शुरू कराने के लिए तीन दर्जन से अधिक पत्र प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सिंचाई मंत्री और पूर्वांचल के सांसदों को भेज चुके हैं। श्रावस्ती के सांसद ने इस परियोजना को शुरू कराने के लिए प्रधानमंत्री को पत्र भी दिया। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर एक बार फिर भारत-नेपाल सीमा पर जनप्रतिनिधि मेडिकल कालेज और रेलवे लाइन बिछाने की बात कर रहे हैं, लेकिन इस महत्वपूर्ण परियोजना को शुरू कराने की फुर्सत किसी को नहीं है।

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