निरीक्षण करने गए मंत्री से डॉक्टर की भिड़ंत

Siddhartha nagar Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
सिद्धार्थनगर। प्रदेश के चिकित्सा और स्वास्थ्य राज्य मंत्री शंखलाल मांझी ने मंगलवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। निशाने पर सीएमएस रहे। राज्यमंत्री को उस समय असहज हो जाना पड़ा, जब एक फिजिशयन उनसे उलझ गए। फिजिशियन ने खुद को निलंबित या टर्मिनेट करने की बात कही तो तो मंत्री को भी प्रमुख सचिव से बात करनी पड़ी। राज्य मंत्री ने अस्पताल प्रशासन को व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम दिया तो संसाधन भी जुटाने की बात कही।
सोमवार की शाम जिले में पहुंचे राज्यमंत्री मंगलवार की सुबह 8:30 बजे जिला अस्पताल पहुंच गए। दौरे की जानकारी अस्पताल प्रशासन को पहले ही हो गई थी। इससे अस्पताल को चमका दिया गया था। राज्यमंत्री ने इमरजेंसी के साथ ही वार्डों का भी मुआयना किया।
कहां से लेते हो दवा
मरीज नंबर एक: चिल्ड्रेन वार्ड के बेड नंबर तीन पर भर्ती सर्वेश के परिजनों से उन्होंने बात की। यहां दवाएं बाहर से खरीदी हुईं मिलीं। मंत्री ने सीएमएस से इसकी जानकारी ली। पता चला कि दस दिन पहले दवा खत्म हुई और पांच दिन पहले उन्होंने दवा की मांग की। पांच दिन तक क्या करते रहे ? इस सवाल का जवाब उनके पास नहीं था। यहां बताया गया कि मरीज को इंजेक्शन अस्पताल से ही लगा था।
मरीज नंबर दो: चिल्ड्रेन वार्ड के बेड नंबर आठ पर भर्ती मोहम्मद तारिक के परिजनों से बात की। पूछा क्या-क्या मिला अस्पताल से? जवाब मिला ग्लूकोज की बोतल। उसने कुछ दवाएं बाहर की भी दिखाई। यहां एक इंजेक्शन पर्ची में दर्ज नहीं था। इसका जवाब न सीएमएस दे सके और न ही इलाज करने वाले चिकित्सक। मंत्री को बताया गया कि मरीज अपने मन से ला दिया होगा।

मरीज नंबर तीन: महिला जनरल वार्ड में भर्ती मरीज गुड़िया के पास पहुंचे मंत्री ने जब पूछा डिलिवरी के दौरान कितना पैसा दी हो? इस सवाल पर मरीज ही असहज हो गई, बताई उसके परिजन आएंगे तो बताएंगे। यहां पंद्रह मिनट तक परिजनों का इंतजार मंत्री ने किया लेकिन वे नहीं आए। यहां मंत्री ने महिला अस्पताल की सीएमएस डा. आशा पांडेय से प्रतिमाह देखे जाने वाले मरीजों की स्थिति जानीं।

मरीज नंबर चार: महिला वार्ड में भर्ती ज्योत्सना के पास मंत्री पहुंचे। पूछे कि अस्पताल में कितना पैसा दी हो डिलिवरी के लिए। मरीज हंसी और और उसने इस बात से इंकार कर दिया कि या कि उसने कुछ अस्पताल में पैसा दिया है। बोली सब कुछ चकाचक है। अस्पताल प्रशासन अच्छा कार्य कर रहा है। दवाएं मिली हैं। यहां मंत्री ने जननी सुरक्षा योजना के तहत दिए जाने वाले चेक वितरण रजिस्टर को भी देखा।
मंत्री से बोले डाक्टर, कर दें टर्मिनेट
सिद्धार्थनगर। बाल रोगी मोहम्मद तारिक के पास जब राज्यमंत्री दवा की उपलब्धता को लेकर सीएमएस को निशाने पर लिए तो पास खड़े डॉक्टर महेश प्रसाद ने इसका विरोध किया। उन्होंने राज्यमंत्री से कहा कि जब मरीज ही बाहर से दवा लिखने को बोलते हैं तो क्या करूं। मंत्री ने जब कहा जब दवाएं हैं तो यहीं से दो। इसके बाद मामला गरमाया। डॉक्टर से राज्यमंत्री की तीखी नाेंकझोंक हुई। क्या करेंगे, निलंबित कर देंगे या टर्मिनेट करेंगे, करिए मैं भी देखना चाहता हूं ? इसके बाद मंत्री ने प्रमुख सचिव संजय अग्रवाल से बात की और पूरी स्थिति से अवगत कराया। कार्रवाई की बाबत पूछने पर उन्होंने कहा कि हमारा कार्य पहले व्यवस्थाएं सुधारना है। यदि कोई गलती कर रहा है तो यह उसकी अपनी मानसिकता है। सरकार बदल गई है लेकिन कुछ अफसर पुरानी व्यवस्था पर ही कार्य कर रहे हैं। ऐसे लोगों पर विभागीय कार्रवाई की जानी तय है।

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