मुर्दे भी बना दिए गए मनरेगा के मजदूर

Siddhartha nagar Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। जोगिया विकास खंड में ऐसे लोगों को भी मनरेगा का मजदूर बनाकर मजदूरी दे दी गई, जिनकी काफी पहले मौत हो चुकी है। स्कूल में पढ़ने वाले छात्र के अलावा स्कूल की रसोइया भी मनरेगा की मजदूरी प्राप्त कर रही है। यहां मंडलायुक्त के आदेश पर भी ग्राम प्रधान और सेक्रेटरी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यहां के भ्रष्टाचार की कलई जनसूचना अधिकार के तहत मांगी गई सूचनाओं से हुई है। 19 नवंबर को बस्ती से आए विशेष जांच दल ने यहां के भ्रष्टाचार की बानगी को देखा।
केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार ने जिस मंशा के साथ गांवों के विकास और लोगों का पलायन रोकने के लिए मनरेगा योजना की पृष्ठभूमि तैयार कर उसे लागू किया था, वह जोगिया विकास खंड में पूरी तरह धराशाई है। यहां मनरेगा मजदूरों के पास जॉब कार्ड होने के बाद भी काम पाने के लिए भटकना पड़ता है। वहीं अपात्र लोगों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है। जोगिया ग्राम पंचायत में जगई का निधन हुए लगभग 30 वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन वर्ष 2010 में जॉब कार्ड यूपी-51-027-00119 की मदद से 5200 रुपये मजदूरी का भुगतान किया गया है। इस मामले में जगई के पुत्र जमुना को आवेदक दिखाया गया है और भुगतान भी उसी के खाते में किया गया है। इतना ही नहीं, यहां नाबालिग छात्रों को भी मनरेगा मजदूर बना दिया गया है। कुमारी मंशा और विश्वजीत के नाम पर भी जॉब कार्ड बनाए गए हैं, जबकि दोनों बच्चे स्थानीय विद्यालय में अध्ययन करते हैं। होमगार्ड विभाग के जोगिया कंपनी में कार्यरत बालकृष्ण को वर्ष 2008 जून तथा वर्ष 2010 के फरवरी माह में ड्यूटी के साथ मनरेगा में कार्य करना दिखाकर 2000 रुपये का भुगतान दिया गया है। इसके साक्ष्य के रूप में जॉब कार्ड और मस्टरोल तथा होमगार्ड विभाग की सूचना मौजूद है। यहां ग्राम प्रधान ने अपने सगे-संबंधियों को लाभ पहुंचाने के लिए 43 जॉब कार्ड तथा 11 बीपीएल कार्ड बनवा रखे हैं। गांव के कोटेदार के पास भी तीन जॉब कार्ड और दो बीपीएल कार्ड मौजूद हैं।
इस मामले का खुलासा जनसूचना अधिकार के माध्यम से हुआ है। जोगिया के समाजसेवी अरविंद कर पाठक ने इस मामले में सूचना मांगी थी। विभाग ने जो सूचना मुहैया कराई, उसी से इस भ्रष्टाचार की कलई खुली। अरविंद कर पाठक ने इसकी शिकायत आयुक्त ग्राम विकास मनरेगा लखनऊ से की, जहां से स्थानीय अधिकारी को जांच का आदेश दिया गया था, लेकिन विभाग ने इस आदेश को रद्दी में डाल दिया। इस मामले में जब दोबारा आयुक्त अनिल गर्ग का पत्र डीएम के पास आया, तबसे इस मामले की जांच में तेजी आई है। 19 नवंबर 2012 को इस मामले की जांच के लिए जब टीएसी टीम बस्ती जब अचानक जिले में पहुंची, तबसे कुछ लोगों में खलबली मची हुई है। जांच टीम ने यहां एक लाख 60 हजार रुपये का घोटाला पकड़ा, जिसे खड़ंजा लगवाने के मद में खर्च किया गया था। इसके अलावा पोखरे के सौंदर्यीकरण कार्य में भी अनियमितता पाई गई। फर्जी भुगतान और अन्य मामलों में भी जांच टीम को पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी अनिल कुमार पांडेय का कहना है इस मामले में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। जिला स्तरीय अधिकारी इस मामले पर विस्तृत जानकारी दे सकते हैं।

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