जिले में उच्च और टेक्निकल शिक्षा का अभाव

Siddhartha nagar Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। 29 दिसंबर को जिले के गठन की 25 वीं वर्षगांठ है। जिस मकसद से जिले का सृजन किया गया, वह अब तक पूरा नहीं हो सका। विकास के मामले में इस जिले की गिनती पिछड़े जनपदों में होती है। मूलभूत सुविधाओं का अब भी अभाव बना है। शिक्षा के क्षेत्र में यह जनपद काफी पीछे है। शैक्षिक स्तर में यहां कोई खास बदलाव नहीं आया। अब भी उच्च शिक्षा और टेक्निकल शिक्षा के लिए युवाओं को जिले से बाहर की ओर रुख करना पड़ता है।
वर्ष 1988 में जिले में उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए मात्र तीन महाविद्यालय ही स्थापित थे। नौगढ़, बांसी और शोहरतगढ़ में स्थित इन महाविद्यालयों में मात्र शोहरतगढ़ में ही विज्ञान विषय से स्नातक करने की सुविधा प्राप्त थी। स्नातक से ऊपर की शिक्षा के लिए लोगों को गोरखपुर और बलरामपुर जिलों की शरण लेनी पड़ती रही है। फिलहाल इस क्षेत्र सबसे बड़ा बदलाव यह है कि महाविद्यालयों की तादात तीन से बढ़कर अब 22 हो गई है। जबकि शैक्षिक गुणवत्ता और स्तर में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ, सिवाय शोहरतगढ़ महाविद्यालय में दो विषयों से पीजी कक्षाएं संचालित होने और डुमरियागंज चौखड़ा में एक राजकीय महिला महाविद्यालय स्थापित होने के। अब भी लोगों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर का ही रास्ता देखना पड़ रहा है।
पांच तहसीलों वाले इस जिले में माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षा का भी हाल-बेहाल है। इंटर कालेजों की तादात 15 से बढ़कर 120 हो चुकी है। इनमें तीन राजकीय कन्या इंटर कालेज और 16 राजकीय माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। कई नर्सरी विद्यालयों की स्थापना तो हुई, लेकिन गुणवत्ता परक शिक्षा का अब भी अभाव है। केंद्र सरकार के प्रयास से जिले में दो राजकीय इंटर कालेजों का निर्माण हो रहा है, जो अभी पूरा नहीं हो पाया है। अधिवक्ता अमित त्रिपाठी कहते हैं कि गुणवत्ता परक शिक्षा के अभाव से जिले में शिक्षा का माहौल नहीं बन पा रहा है। इससे लोगों को अपने बच्चों को उच्च और टेक्निकल शिक्षा के लिए बाहर ही भेजना पड़ता है। इस बाबत जिला विद्यालय निरीक्षक संध्या श्रीवास्तव कहती हैं कि जिले में उपलब्ध संसाधनों से ही गुणवत्तापरक शिक्षा देने कराने का प्रयास किया जा रहा है।
मालूम हो कि प्राइवेट क्षेत्र के एक डिप्लोमा देने वाले विद्यालय के अलावा जिले में कोई भी टेक्निकल कालेज नहीं है। केंद्र सरकार के मल्टीसेक्टोरल प्लान के तहत दो राजकीय आईटीआई कालेजों के निर्माण के लिए धन आने के बावजूद अब तक मात्र नौगढ़ आईटीआई कालेज का ही निर्माण हो रहा है। डुमरियागंज में निर्माण नहीं शुरू होने के पीछे जमीन की अनुपलब्धता को वजह बताई जा रही है। सांसद जगदंबिका पाल कहते हैं कि केंद्र सरकार की तरफ से किए जा रहे प्रयास को राज्य सरकार से सहयोग नहीं मिल पा रहा है।

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