सोलर लाइट से उजाले की आस अधूरी

Siddhartha nagar Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। गांवों को जगमगाने के लिए सोलर स्ट्रीट लाइट तो लगा दिए गए हैं, लेकिन अब भी योजना से आच्छादित जगहों वाले चौराहों और गांवों में कई जगह लाइट खराब हैं। सोलर स्ट्रीट लाइट की खराबी के तो कम मामले सामने हैं, लेकिन हाईमास्ट और चौराहों पर उजाला के लिए लगे लैंप पूरी तरह खराब हैं। विधायक तथा सांसद निधि के कई लाख रुपये सोलर लाइट पर खर्च किए गए हैं, लेकिन इनका हाल लेने वाला कोई नहीं है। सबसे खराब हालात को अंबेडकर गांवों में हैं, जो अब विकास विभाग की प्राथमिकता से कहीं दूर हो चुका है।
गांवों में उजाला लाने तथा बिजली बचाने के उद्देश्य से नेडा ने सोलर स्ट्रीट लाइट योजना चलाई। इसके तहत ग्राम सभा के प्रस्ताव पर सोलर स्ट्रीट लाइट लगाने की कवायद हुई। प्रस्ताव दो तरह से मांगे। एक विधायक या सांसद निधि तो दूसरा प्रोजेक्ट के तहत। प्रोजेक्ट में कम से कम पांच सोलर स्ट्रीट लाइट का प्रावधान रखा गया। बीते एक साल के अंदर जिले के दो हजार स्थानों पर सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाने का कार्य किया गया। इसके स्ट्रीट लाइट लगाई गईं और इसके मेंटेंस का जिम्मा एक प्राइवेट शाप को दिया गया। हालांकि ये स्ट्रीट लाइटें चार साल के गारंटी में हैं। ऐसे में विभाग भी पूरी तरह निश्चिंत है कि बिगड़ेगा तो बनेगा जरूर, लेकिन हो ये रहा है कि कई जगहों से खराबी की सूचना विभाग तक पहुंच ही नहीं पा रही है। लोटन क्षेत्र के बनियाडीह चौराहा और नेतवर स्थित एस सिंह के आवास के सामने लगी लाइट खराब है। खुनुवा और दोहरिया चौराहा पर सोलर स्ट्रीट लाइट तो नहीं है, लेकिन लगा हाईमास्ट कई महीनों से खराब पड़ा है। इस क्षेत्र में इस योजना के तहत सोलर स्ट्रीट लाइटों की संख्या काफी कम है। सीडीओ श्याम नारायण त्रिपाठी कहते हैं कि जो लाइटें खराब हैं, उनकी सूचना जरूर दी जाए। नेडा की जिम्मेदारी है कि वह इसे ठीक कराएं, क्याेंकि ये गारंटी में रहते हैं। फिर भी इस मामले को प्राथमिकता के साथ देखा जाएगा। वहीं नेडा के पीओ राजीव मिश्र कहते हैं कि जो सूचनाएं हम तक आती हैं, उसे प्राथमिकता के साथ देखा जाता है।

20900 में है एक सोलर लाइट
सिद्धार्थनगर। एक सोलर लाइट का कुल मूल्य 20900 रुपये है, जबकि प्रोजेक्ट के जरिये इसे लेने पर यदि आवेदन स्वीकृत हुए तो यह 7806 रुपये में मिल जाएंगे। इसके अलावा विधायक और सांसद निधि से यह सोलर लाइट आसानी के साथ मिल जाती है। शायद यही कारण है कि इन निधियों का ज्यादा से ज्यादा धन सोलर लाइट पर जाता है।

एक प्रतिशत हो सकती है खराबी की स्थिति
सिद्धार्थनगर। विभागीय सूत्र बताते हैं कि जो सोलर स्ट्रीट लाइट लगी हैं, उसमें एक प्रतिशत ही खराब है। यह संख्या भी ज्यादा है। हालांकि सही संख्या बताने से विभाग बच रहा है। पर वास्तविकता यह है कि दो हजार सोलर स्ट्रीट लाइट में ज्यादा से ज्यादा खराब हैं। कई तो ऐसी हैं जिनकी सूचना तक विभाग के पास नहीं है।

क्या है बिगड़ने का कारण
सिद्धार्थनगर। सोलर लाइटों के खराब होने के पीछे विभागीय सूत्र बताते हैं कि यदि इससे डोेमेस्टिक लाइट जलाई जाएगी तो खराबी तो आएगी ही। साथ ही बैटरियों में समय से पानी तथा उसकी सफाई भी जरूरी होती है। यह सब नहीं होता है ऐसे में खराबी आनी स्वाभाविक है। यदि यह गारंटी में है तो इसका रिप्लेसमेंट भी किया जाता है।

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