टावरों के रेडिएशन से बीमारियों का खतरा

Siddhartha nagar Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। मोबाइल ने लोगाें की दूरियों को मिटा दिया है, लेकिन इनसे निकलने वाला रेडिएशन बीमारियों को बढ़ावा दे रहा है। मानव के साथ पशु-पक्षी भी इस रेडिएशन के चलते प्रभावित हो रहे हैं। टावरों से निकलने वाले रेडिएशन को लेकर सरकार की ओर से तय मानक की भी अनदेखी की जा रही है। जानकार बताते हैं कि रेडिएशन से सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित होते हैं। इसके प्रभाव से बच्चों का शारीरिक विकास बाधित होता है।
जिले में करीब 160 टावर लगवाए गए हैं। इनमें 60 टावर बीएसएनएल के हैं। बाकि सब प्राइवेट कंपनियों के हैं। टावर और मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन दो प्रकार के होेते हैं। पहला रेडिएशन गर्मी देता है। दूसरा रेडिएशन मानव शरीर के अंदर उसके नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है। इससे चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, अवसाद, जी मिचलाना, भूख न लगाना, धड़कनों का बढ़ना सहित और कई लक्षण सामने आते हैं।

डाक्टरों की राय
सिद्धार्थनगर। डॉ. संगीता पांडेय का कहना है कि रेडिएशन से निकलने वाली विकिरण का प्रभाव गर्भवती महिलाओं पर सबसे ज्यादा होता है। बच्चों के ब्रेन पर रेडिएशन का सीधा असर पड़ता है, जिससे बच्चों में मंदबुद्धि, अपंगता की बीमारी होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। गर्भस्थ शिशुओं का विकास प्रभावित होता है। डॉ. तमन्ना निजाम का कहना है कि मोबाइल के टावरों से निकलने वाले रेडिएशन की वजह से शारीरिक विकास प्रभावित होता है। रेडिएशन की चपेट में सबसे ज्यादा छोटे बच्चे ही आते हैं।

छोटे पक्षी रास्ते से भटक जाते हैं
सिद्धार्थनगर। सिंहेश्वरी इंटर कालेज के भौतिक विज्ञान के लेक्चरर हृदय नरायन मिश्रा का कहना है कि इस आधुनिक युग ने मानव जीवन को आलसी बना दिया है। इससे सर्वाधिक नुकसान मानव जीवन को ही हो रहा है। रेडिएशन से सर्वाधिक नुकसान पशु-पक्षियों को होता है। इसके प्रभाव से छोटे पक्षी अपना रास्ता भटक जाते हैं। उनका कहना है कि मोबाइल के टावरों से निकलने वाले रेडिएशन आज मानव जीवन के लिए सबसे खतरनाक साबित हो रहे हैं।

सरकार की ओर से तय मानक
सिद्धार्थनगर। टावरों से निकलने वाले रेडिएशन के लिए सरकार ने मानक तय कर रखा है। अपने देश में 9.2 वर्ट प्रतिमीटर स्क्वायर डेंसिटी (रेडिएशन मापक पैमाना) क्षमता है। नए नियम के अनुसार इसको घटाए जाने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं। जबकि विकसित देशों में यह क्षमता 0.02 से लेकर .00001 वर्ट प्रतिमीटर स्क्वायर डेंसिटी है। अगर जल्द ही इस पर नहीं अमल किया गया तो इसके परिणाम भयानक होंगे।

मानक के तहत लगे हैं टावर : जीएम
सिद्धार्थनगर। इस संबंध में दूर संचार के जीएम एमएन उपाध्याय कहते हैं कि मंडल में जो भी बीएसएनएल टावर लगवाए गए हैं, वे सरकारी मानक के तहत ही हैं। जिले में करीब 60 टावर बीएसएनएल के लगवाए गए हैं। प्राइवेट कंपनियों से कोई मतलब हम लोगों का नहीं रहता है।

मानक की अनदेखी पर होगी कार्रवाई : डीएम
इस संबंध में डीएम ह्रषिकेश यशोद भास्कर का कहना है कि अगर ऐसी बात है तो टावरों के मानक को चेक कराया जाएगा। अगर मानक के विपरीत टावर लगाए गए हाेंगे तो कार्रवाई की जाएगी।

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