आखिर कहां गया गांधी चबूतरा

Siddhartha nagar Updated Thu, 18 Oct 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। सैकड़ाें जनसभाओं के गवाह रहे जिला मुख्यालय के गांधी चबूतरे का आज कोई अस्तित्व नहीं है। जनपद के निर्माण से पूर्व इस चबूतरे पर कई दिग्गज नेताओं की जनसभाएं हुईं, लेकिन जनपद के निर्माण के बाद धीरे-धीरे इस चबूतरे का अस्तित्व समाप्त हो गया। बाद में इसे तोड़कर समतल बना दिया गया। इसी गांधी चबूतरे के कारण ही इस क्षेत्र को गांधीनगर मोहल्ला नाम दिया गया था। मोहल्ला तो आज भी है पर गांधी चबूतरे का अस्तित्व समाप्त हो चुका है।
लगभग चार दशक पहले नगर के बुद्धिजीवियों, व्यापारियों व जनप्रतिनिधियों की पहल पर इस चबूतरे का निर्माण मुख्यालय के गांधी आश्रम के बगल में कराया गया था। इस चबूतरे के निर्माण के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बड़े नेताआें के कार्यक्रम यहां आयोजित होते थे। अपने समय में गांधी चबूतरा हर आंदोलन और जनसभाओं का प्रतीक रहा है। यहां देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के अलावा पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, राजनाथ सिंह, वीरबहादुर सिंह, केशवदेव मालवीय, पूर्व मंत्री धनराज यादव तथा दिनेश सिंह जैसे तमाम दिग्गज नेताओं ने इसी चबूतरे से जनता तक अपनी बात पहुंचाई थी। इससे पहले यहां से सटे मोहल्ले का नाम अनूपनगर हुआ करता था लेकिन इस चबूतरे के महत्व के कारण ही बाद में इसे गांधीनगर नाम मिला और गांधी जी की प्रतिमा भी स्थापित की गई। इसी गांधी चबूतरे पर होली और ईद मिलन समारोह भी आयोजित होते थे। जिले के निर्माण से पूर्व इस चबूतरे की बड़ी अहमियत थी पर जब वर्ष 1989 में सिद्धार्थनगर जिले का सृजन हुआ उसके बाद से ही यह गांधी चबूतरा अस्तित्व विहीन हो गया।
कुछ वर्ष पूर्व ही इस चबूतरे का तोड़कर समतल बना दिया गया है तथा इसका व्यवसायिक उपयोग हो रहा है। गांधी चौक का नाम आज भी वही है पर जनसभा करने के लिए यहां जगह नहीं बची है। इस बार नगरपालिका के चुनाव के दौरान अंतिम जनसभा योगी आदित्यनाथ व रीता बहुगुणा जोशी की थी लेकिन जगह की कमी से आयोजकों का काफी दिक्कत झेलनी पड़ी, जिसके बाद यहां कोई बड़ा आयोजन नहीं हुआ।
क्या कहते हैं लोग
गांधी चबूतरा मुख्यालय की पहचान थी। यहां आंदोलन, धरना प्रदर्शन और बड़े नेताओं के कार्यक्रम आयोजित होते थे। नगरपालिका के अस्तित्व में आने के बाद इस पर ग्रहण लग गया। चबूतरे की जगह का प्रयोग व्यवसायिक कार्यों में किया जा रहा है। इस मामले की शिकायत उन्होंने राज्यपाल व मुख्यमंत्री से भी की है। (सूरज जायसवाल, एनसीपी)
इसे अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपने कार्यकाल में काफी लिखापढ़ी कराकर अधिकारियों को इसी सूचना भेजी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। चबूतरे से अतिक्रमण हटना चाहिए। यह एक कालखंड का गवाह है। (घनश्याम जायसवाल, पूर्व चेयरमैन )

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