जमकर काटी मनरेगा की मलाई

Siddhartha nagar Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की सरकारी मंशा के तहत जिले में मनरेगा योजना के आए करोड़ों रुपये कहां खर्च हो गए, इसका कुछ पता नहीं। ये सवाल जनप्रतिनिधियों ने विगत दो बैठकों में उठाए हैं। मामला है पिछले वर्षों में वन, कृषि, सिंचाई व लोक निर्माण विभाग समेत कई विभागों को मनरेगा के तहत आवंटित धन का।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जाबकार्ड धारकों को रोजगार देने के उद्देश्य से जिले में ग्राम पंचायत व क्षेत्र पंचायत के तरफ से कार्य कराया जाता है। इनके अतिरिक्त अन्य विभागों को भी रोजगारपरक कार्यों को कराए जाने के लिए मनरेगा के तहत धन आवंटित किए गए। वित्तीय वर्ष 2011-12 में लोक निर्माण, सिंचाई, वन व कृषि समेत अन्य विभागों को मनरेगा के तहत कुल 1958.13 लाख रुपये उपलब्ध कराए गए। जिनमें 1617.07 लाख रुपये खर्च हुए हैं।


धन पाने में आगे रहे कृषि, वन, सिंचाई व लोक निर्माण विभाग

वर्ष 2011-12 में मनरेगा के तहत विभागों को आवंटित धन (लाख रुपये में)

विभाग आवंटित धन खर्च शेष
लोक निर्माण 486.47 443.08 43.39
कृषि विभाग 204.82 130.09 74.73
वन विभाग 228.09 216.57 11.52
सिंचाई 309.21 198.05 111.16


धन को खर्च करने में आगे रहे ये

विभाग आवंटित खर्च
ग्रामीण अभियंत्रण 100.00 93.98
जिला पंचायत 396.16 314.01
लघु सिंचाई 72.80 72.80
उद्यान 128.48 128.48
मत्स्य 5.22 5.22
रेशम विभाग 2.00 2.00

इस वित्तीय वर्ष 2012-13 के सितम्बर माह तक मनरेगा के तहत उपलब्ध कुल धनराशि 631.87 लाख रुपये में 207.15 लाख रुपये विभिन्न विभागों ने खर्च किए, जिसमें सबसे अधिक 143.91 लाख खर्च कर सिंचाई विभाग अव्वल रहा।


जनप्रतिनिधियों ने कहा, पंचायतों की तरह हो सोशल आडिट
विगत दिनों हुई जिला योजना और निगरानी समिति की बैठकों में जनप्रतिनिधियों ने इन कार्यदायी संस्थाओं के कार्यशैली पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि इन संस्थाओं के मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों की ग्राम पंचायत की तरह सोशल आडिट कराई जानी चाहिए। इन कार्यदायी संस्थाओं के कराए गए कार्यों की निगरानी नहीं होने से इसमें अनियमितता की पूरी संभावना होती है। सदस्यों ने इनमें अनियमितता व लापरवाही का आरोप लगाया। इसके बाद प्रभारी मंत्री महफूज अहमद किदवई ने डीएम हृषिकेश भास्कर यशोद को निर्देश दिया कि इन कार्यों की जांच करा इसकी रिपोर्ट जिला योजना की अगली बैठक में दें।

योजनाएं पूरा करने को चाहिए 60 करोड़
पिछले वर्ष की अधूरी पड़ी योजनाओं और इस वर्ष प्रस्तावित कार्यों को पूरा करने के लिए इन विभागों ने मनरेगा के तहत 5995.22 रुपये की मांग की है। इसमें कृषि विभाग ने 453.60 लाख रुपये, उद्यान विभाग ने 499.06 लाख, वन विभाग ने 1566.68 लाख, सिंचाई विभाग ने 1571.87 लाख व लोक निर्माण विभाग ने 1562.85 लाख रुपये की मांग की है।

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