इंसेफेलाइटिस : बीते चार दिनों में 15 मौतें, 73 रेफर

Siddhartha nagar Updated Mon, 10 Sep 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। मासूमों पर मौत बनकर टूट रही इंसेफेलाइटिस से रोकथाम को लेकर जिले के जिम्मेदार बेपरवाह हैं। सरकार इस मुद्दे पर सिर्फ वादे करने तक सीमित है। बीते चार माह में 15 मौतें होने और 73 केस गोरखपुर रेफर होना भी सोए जिम्मेदार लोगों को जगाने में काफी नहीं हैं। संसाधन के अभाव के कारण मरीज जिला अस्पताल के बजाए गोरखपुर मेडिकल कालेज जाना मुनासिब समझ रहे हैं। सीएमओ का कहना है कि जिला अस्पताल में इंसेफेलाइटिस की पर्याप्त दवाएं हैं। यहां से केवल गंभीर मरीजों को ही गोरखपुर मेडिकल कालेज रेफर किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने जिले में टीकाकरण अभियान तो चलाया लेकिन यह शत-प्रतिशत न हो पाने के कारण मरीज बढ़ते ही गए। जिला अस्पताल में जुलाई से 07 सितंबर तक 73 मरीज इलाज के लिए आ चुके हैं। जबकि चार माह के भीतर 15 मासूम मौत का शिकार हो चुके हैं। जो मरीज गंभीर थे उन्हें रेफर किया जा चुका है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि इस बीमारी से पीड़ित लोगों में से तकरीबन 30 फीसदी की मौत हो जा रही है।

केवल कागजों में हुआ टीकाकरण
लोकसभा चुनाव में प्रचार को आए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने टीकाकरण को गंभीरता से लेने का निर्देश दिया था। टीकाकरण हुआ भी लेकिन कागजों में। टीकाकरण अभियान चलाने के दावे तो बहुत किए गए लेकिन अधिकांश दावे फेल नजर आ रहे हैं। थरौली निवासी गणेश कहते हैं कि उन्हें इंसेफेलाइटिस के टीके लगाए जाने की कोई जानकारी नहीं है। बर्डपुर चौदह के टोला खैरहवा के अलावा अमौरा गांव में भी टीकाकरण नहीं हुआ। मोतीपुर और खैरनहिया का भी यही हाल है। जबकि इन गांवों में इंसेफेलाइटिस पीड़ित मिल चुके हैं। जबकि गोल्हौरा में इंसेफेलाइटिस से एक सप्ताह पूर्व एक युवक की मौत हो चुकी है। जबकि एक युवती बीमार थी। उसी समय चेतिया में भी एक युवक की इंसेफेलाइटिस से मौत हो चुकी है।

शुद्ध पेयजल नहीं हो रहा मयस्सर
एक तरफ जहां इंसेफेलाइटिस जैसी भयानक बीमारी से निपटने के लिए सरकार पैसे को पानी की तरह बहा रही है, वहीं जनपद वासियों को शुद्ध जल तक नहीं मयस्सर हो पा रहा है। स्थिति यह है कि जनपद में 29735 इंडिया मार्का हैंडपंप में से आधे से अधिक रीबोर नहीं किए जाने से गंदा पानी उगल रहे हैं।

निपटने को पूरी तरह तैयार है विभाग : सीएमओ
सीएमओ डा. एसएन पांडेय का कहना है कि
विभाग पूरी तरह से इंसेफेलाइटिस जैसी भयानक बीमारी से निपटने के लिए तैयार है। जो भी मरीज आते हैं उनका इलाज किया जाता है, जिनकी स्थिति गंभीर होती है, उन्हें गोरखपुर मेडिकल कालेज के लिए रेफर किया जाता है। दवाओं के बारे में विभाग के आला अधिकारियों को जानकारी दी गई है, आर्डर बनाकर भेजा जा चुका है। जैसे ही दवाएं आएंगी, मरीजाें को उपलब्ध करा दी जाएगी।

इंसेफेलाइटिस ने दो मासूमों को लीला

भारतभारी। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में रविवार को दो मासूम बच्चियों की मौत से क्षेत्र में दहशत व्याप्त हो गई। जानकारी के अनुसार भटगंवा गांव निवासी अकील हैदर की बेटी जूबी फातिहा (07) की दिमागी बुखार से रविवार को जिला अस्पताल बस्ती में इलाज के दौरान मौत हो गई। उधर, पथरा थानाक्षेत्र के मिरवापुर के बेचन की बेटी सपना (13) को ुखार होने पर बेंवा सीएचसी पर इलाज के लिए लाया गया। जहां डाक्टरों ने जेई के लक्षण देख उसे जिला अस्पताल बस्ती रेफर कर दिया। मगर इलाज के दौरान सपना की मौत हो गई। इन दो मौतों के अलावा भी क्षेत्र में संक्रामक रोगों और दिमागी बुखार से कई लोगों की मौतें हो चुकी हैं। क्षेत्र में जेई के दस्तक के बावजूद भी स्वास्थ महकमा लापरवाह बना हुआ है। जिससे यह रोग लगातार बढ़ रहा है। क्षेत्र के किसी भी गंाव में अभी तक स्वास्थ सुविधा की कोई समुचित व्यवस्था नही की गई है। जिससे क्षेत्रवासियों में स्वास्थ विभाग के प्रति काफी आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने गंाव में दवाओं के छिड़काव की जल्द से जल्द मंाग की है।

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