सिद्धार्थनगर के लिए आदर्श बने अष्टभुजा पांडेय

Siddhartha nagar Updated Fri, 07 Sep 2012 12:00 PM IST
डुमरियागंज। सिद्धार्थनगर जिले को शिक्षा जगत का सबसे बड़ा पुरस्कार दिलाकर बुधवार को डुमरियागंज के शिक्षक अष्टभुजा पांडेय ने वह कर दिखाया। जिसे पाने की हर शिक्षक का सपना होता है। राष्ट्रपति भवन में शिक्षा के प्रति उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। साधारण परिवार में जन्मे अष्टभुजा पांडेय अपने इस सम्मान का श्रेय अपने साथी अध्यापकों को देते हैं।
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के पिकौरा श्यामपुर गांव निवासी अष्टभुजा पांडेय ने शिक्षा के प्रति अपने समर्पण और लगन से उस मुकाम को पा लिया है। 27 मार्च 1954 को जन्मे 58 वर्षीय अष्टभुजा पांडेय ने हाईस्कूल की परीक्षा कादिराबाद से 1970 और इंटर की परीक्षा कस्बे स्थित पीपुल्स इंटर कालेज से 1972 में उत्तीर्ण की हैं। इसके बाद उन्होंने उस समय डुमरियागंज में चल रहे दीक्षा विद्यालय से 1976 में बीटीसी की परीक्षा पास की। इस विद्यालय का वर्तमान समय में वजूद समाप्त हो गया है। पांडेय की पहली नियुक्ति बतौर अध्यापक सात अप्रैल 1983 को भनवापुर ब्लाक के मल्दा के प्राइमरी स्कूल पर हुई। जिसके बाद उनका तबादला डुमरियागंज ब्लाक क्षेत्र के रठैना स्थित प्राइमरी विद्यालय पर बतौर सहायक अध्यापक के रूप में हुई। जहां उन्होंने लगातार 19 वर्षों तक शिक्षा सेवा भाव में लगे रहे। 31 जनवरी 2003 को उन्हें प्रमोशन देकर डुमरियागंज प्रथम प्राइमरी स्कूल का हेडमास्टर नियुक्त किया गया। तब से लेकर आज तक वे इसी स्कूल पर तैनात हैं। इसके पूर्व इन्हीं के साथ रहे और बगल स्थित जूनियर स्कूल के हेडमास्टर फजल अहमद फारूकी को भी वर्ष 2003 में राज्यपाल द्वारा राज्य शिक्षक सम्मान के पुरस्कार से नवाजा गया था।

देखते ही बनता है अनुशासन
एक तरफ जहां परिषदीय स्कूलों में लोगों का अपने बच्चों को पढ़ाने के प्रति मोह टूट रहा है। वहीं अष्टभुजा पांडेय की तैनाती वाले प्राइमरी पाठशाला डुमरियागंज प्रथम पर करीब 500 सौ बच्चे पंजीकृत होने के बाद आज भी नामांकन का सिलसिला जारी है। छात्र संख्या अधिक होने के बाद भी स्कूल में अनुशासन देखते ही बनता हैं। स्कूल समय के दौरान कोई भी बच्चा स्कूल के बाहर घूमता नहीं दिखाई पड़ता है और न ही बच्चों का शोरगुल सुनाई पड़ता है। जागरूकता रैली में इस स्कूल के बच्चे कतार में सबसे आगे रहते हैं। स्कूलों द्वारा निकाले गये सभी राष्ट्रीय कार्यक्रमों और जागरूकता रैलियों, खेलकूद के साथ ही बच्चों में आपसी सामंजस्य स्थापित करने में हमेशा ही इनकी महती भूमिका रही है। इस बात का पता इसी से चल जाता है कि वह छुट्टियों में भी स्कूल को खोल वहां मौजूद रहते हैं।

साथी अध्यापकों में उत्साह
राष्ट्रपति पुरस्कार पाने वाले अष्टभुजा पांडेय के स्कूल में पढ़ाने वाले उनके सहायक अध्यापक बशीर अहमद फारूकी और शिक्षामित्र धर्मेंद्र कुमार, वर्तिका गुप्ता के साथ जूनियर विद्यालय के मिर्जा महबूब, नसीम अहमद और बीआरसी के सह समन्वयक धर्मराज दूबे, वेदप्रकाश श्रीवास्तव, आबिद रिज्वी, मुश्ताक अहमद आदि लोगों में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है।
अष्टभुजा पांडेय के परिवार में मौजूद चार बेटियों और तीन बेटों के साथ ही उनकी पत्नी बिन्दा देवी के खुशी का ठिकाना नहीं है। बुधवार को जैसे ही महामहिम राष्ट्रपति ने अष्टभुजा को सम्मानित किया। उसी समय एक दूसरे को बधाई देने के साथ ही सबका मुंह मीठा करवाने में लग गये। उनके घर बधाई देने वालों का तांता लगा है।




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