जेई वार्ड के लिए अभी करना होगा इंतजार

Siddhartha nagar Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
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सिद्धार्थनगर। इंसेफेलाइटिस ने पूर्वांचल में 1978 में ही दस्तक दी। तब से लेकर अब तक इस बीमारी से पूर्वांचल उबर नहीं सका है। इस वजह से आए दिन मासूम इसकी गिरफ्त में आकर मौत के शिकार हो रहे हैं। इस बीमारी से निपटाने के लिए केंद्र सरकार ने जो पहल की है, वह जनपदवासियों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है, लेकिन जिस तरीके से स्वास्थ्य महकमा आईसीयू वार्ड का निर्माण करा रहा है, उससे यही लगता है कि वह जेई के मरीजों के लिए कितना गंभीर है। इसकी स्थित देखकर यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस वार्ड के लिए मरीजाें को अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
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इंसेफेलाइटिस से हर वर्ष कई जानें जाती हैं। इसके बाद ही केंद्र सरकार ने 10 शैय्या का आईसीयू वार्ड और वेंटिलेटर की सुविधा जनपद में उपलब्ध कराए जाने की योजना बनाई थी। इसके तहत जनपद में कार्य शुरू किया गया। निर्माण इतना धीमा है कि मरीजों के परिजनों को अभी भी यह लगता है कि जेई के इलाज के लिए उन्हें गोरखपुर मेडिकल कालेज या फिर लखनऊ ही जाना पड़ेगा। जबकि वार्ड का निर्माण जुलाई माह के अंत तक हो जाना था। यहां नेपाल से भी इंसेफेलाइटिस के मरीज आते हैं। जिले में इंसेफेलाइटिस से एक दशक के भीतर कम से कम 2200 मासूम मौत के मुंह में समा चुके हैं और 22000 से अधिक लोग इससे प्रभावित हुए। बताते चले कि शासन के विशेष निर्देश पर संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य दो बार जिले का दौरा भी कर चुके हैं। इस संबंध में सीएमएस रामचंद्र का कहना है कि जेई वार्ड का निर्माण कराया जा रहा है। जल्द ही यह वार्ड तैयार हो जाएगा। वार्ड बन जाने से मरीजों को इलाज के लिए दर-दर भटकना नहीं पड़ेगा।
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