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मनचाही रिंग टोन से मूड़े जा रहे हैं ग्राहक

Siddhartha nagar Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
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सिद्धार्थनगर। हर आम और खास की जेब में चुपके से ऐसा जेबकतरा बैठा है जो उसे मंदी के इस दौर में झटके पे झटका दे रहा है। बात हो रही है मोबाइल नेटवर्क संचालित करने वाली कंपनियों की जिनके लुभावने पैकेज मध्यमवर्गीय लोगों को मुफलिसी की ओर धकेल रहे हैं और उच्चवर्ग को हैरान कर रहे हैं। हालत यह है कि कालर ट्यून और गाना बोलिये का जुमला रटने वाले आसानी से तीस से ज्यादा रुपये हर महीने गवां रहे हैं।
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बेहतर और सस्ती सेवा का वादा करके मोबाइल नेटवर्क कंपनियां टापअप रीचार्ज बाउचर पर लगभग पूरी रकम देकर उपभोक्ताओं को खुश करती हैं। लेकिन इसके साथ ही इतने सारे प्लान आ गए हैं कि उनके जाल में एक बार फंसने के बाद उपभोक्ताओं का निकल पाना मुश्किल होता है। वर्तमान में सबसे लोकप्रिय कालर ट्यून को माना जा रहा है। लगभग सभी कंपनियां फिल्मी, भक्ति, देशभक्ति, पॉप गीतों की पेशकश कर अपने कालर को गाना सुनाने की पेशकश करती हैं। एक बार गाना चुनने के बदले तुरंत 15 रुपये कट जाते हैं।
इसके बाद हर माह रेंटल आम तौर पर 30 रुपये तक लग जाते हैं। मैसेज बाक्स में जाएं और राइट क्लिक करें रटने वाली कंपिनयां मोबाइल ग्राहकों को इतने मैसेज प्रतिदिन भेजती हैं कि शाम होते होते यदि ग्राहक उन्हें डिलीट न करे तो मैसेज बाक्स में जगह ही नहीं बचती है। रिंगटोन डाउनलोड करने का खर्च पांच रुपये से अधिक है। इसके अलावा कुछ कंपनियां तो दिन में कई बार अपने उपभोक्ताओं को फोन करके स्टार दबाने को कहती हैं। यदि गलती से फोन किसी बच्चे ने उठाया और उत्सुकता में स्टार दबा दिया तो फिर महीने में 29 रुपये से लेकर 70 रुपये तक की कटौती तय है। इससे पीछा छुड़ाने में अनसब्क्राइब करना पड़ता है और इसमें लोगों के पसीने छूट जाते हैं।
जिला मुख्यालय के मोबाइल विक्रेता विनय कहते हैं कि सभी कंपनियां आकर्षित योजनाएं दिखाकर उपभोक्ताओं को लूट रही हैं। मनचाहा रिंग टोन, सिंग टोन, एडल्ट जोक आदि काल सेंटर से ही मोबाइल पर लोड कर दिया जा रहा है। उपभोक्ता को बिल आने पर पता चल रहा है। कहते हैं कि एक गाना दो मिनट में लोड हो जाना चाहिए, लेकिन उसे इस तरह आफ्शन देकर उलझाया जाता है कि कम से कम 10 मिनट का समय लग जाए। इस प्रकार की लगातार उपभोक्ताओं की शिकायत आ रही है।

हंसने की कीमत 30 रुपये
इन दिनों अकसर मोबाइल पर एक मैसेज आता है। लिखा रहता है कि हंसते रहो और खिलखिलाते रहो। इसके बदले में एक नंबर पर एसएमएस करने को कहा जाता है और इसके बदले तीस रुपये प्रतिमाह रकम कट जाती है। लव टिप्स और म्युजिकल मस्ती की भी अच्छी खासी कीमत है। एक जानीमानी कंपनी तो मस्ती के नाम पर लड़कियों से मीठी बात कराने की अच्छी खासी कीमत वसूल रही है।

20 साल में ढाई अरब हाथों में मोबाइल
मोबाइल का इतिहास दो दशक पुराना है। संचार के क्षेत्र में ग्लोबल सिस्टम फार मोबाइल (जीएसएम) यानी वैश्विक व्यवस्था पर आधारित संचार नेटवर्क तैयार करने के लिए 7 सितंबर 1987 को 15 फोन कंपनियों ने समझौता प्रपत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इन कंपनियों के मुताबिक आज ढाई अरब से ज्यादा हाथों में मोबाइल हैं। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि एक अरब का आंकड़ा पार करने में 12 साल लगे थे लेकिन यही संख्या सिर्फ तीस माह में ही दो अरब पार कर गयी।

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