गेहूं तस्करी का हब बना जिला

Siddhartha nagar Updated Thu, 26 Jul 2012 12:00 PM IST
डुमरियागंज। सोमवार की रात जिले के शोहरतगढ़ स्थित बानगंगा चौराहे पर गेहूं लदा ट्रक एसओजी के हाथ लगा। जिला गेहूं तस्करी के लिए हब बन गया है। दो माह के भीतर जिले में अलग-अलग जगहों से ट्रकों में लदे गेहूं की बरामदगी भी इसका ठोस प्रमाण है। गेहूं को फर्जी कागजात के सहारे गैर जनपद भेजा जा रहा था।
डुमरियागंज कसबे के राप्ती पुल के पास मुखबिर की सूचना पर 21 जुलाई को स्थानीय पुलिस ने खाद्यान्न लदा ट्रक बरामद किया, जिसमें 417 बोरियों में गेहूं को लादा गया था। पूछताछ में पता चला था कि ट्रक इटवा में प्रिया ट्रेडिंग कंपनी से लोड होकर आ रहा है। इसके बाद मंडी कर्मचारियों ने कागजात के जांच के बाद उसे गलत साबित कर दिया था। साथ ही खाद्यान्न मालिक के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया। इसके पहले इसी थानाक्षेत्र के बैदौला चौराहे के पास 18 जून को तीन ट्रकों को पुलिस ने पकड़ा था, जिन पर 91 टन गेहूं लदा था। इसे रूट बदलकर गलत तरीके से मुरादाबाद पहुंचाया जा रहा था। तीनों ट्रकों में से दो इटवा से और एक ट्रक मन्नीजोत से लोड किया गया था। यह मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि डुमरियागंज एसडीएम ने 25 जून को त्रिलोकपुर थानाक्षेत्र के जहदा गंाव निवासी के विशुनपुर हरि स्थित एक किराने की दुकान पर गेहूं पकड़ा, जिसे ट्रक में लोड किया जा रहा था। इन सब मामलों की जांच अभी चल ही रही थी कि 23 जुलाई की रात शोहरतगढ़ स्थित बानगंगा चौराहे के पास मुखबिर की सूचना पर गेहूं लदा ट्रक एसओजी जवानों के हाथ लग गया। ट्रक में 200 बोरियों में गेहूं लदा था। गेहूं के कागजात बिहार के थे। कागजात में गेहूं को बिहार से लादकर उत्तरांचल पहुंचाना दर्शाया गया था। मगर बिहार और उत्तरांचल रूट की ट्रकें जिले के खाद्यान्न को अवैध तरीके से वहां ले जाती हैं। जिले में खाद्यान्न माफिया अपनी जड़ें मजबूत कर चुके हैं। इसका प्रमाण बार-बार गेहूं लदे ट्रकों का पकड़ा जाना है।

कागजात और रूट का है गेम
डुमरियागंज। सूचना के अनुसार तराई इलाकों से अवैध तरीके से खाद्यान्न खरीदकर उसे ट्रकाें पर लाद बिहार भेज दिया जाता है। इसके पीछे क्षेत्र के ही एक व्यवसायी का सबसे बड़ा हाथ है। व्यवसायी की बिहार में भी एक फर्म है। वहां पर वह खाद्यान्न को भेज मोटी कमाई करता है। इससे सरकार को राजस्व शुल्क के रूप में लंबा नुकसान होता है। इटवा या अन्य जगहों से खाद्यान्न लादकर ट्रकों को बिना रूट या सेल्स टैक्स, मंडी के कागज के ही बस्ती हाइवे तक पहुंचने के लिए ड्राइवरों से कहा जाता है। साथ ही उससे आगे मिलने को कह उन्हें रवाना कर दिया जाता है। हाइवे पर पहुंचते ही ड्राइवरों को बस्ती से बिहार तक का रूट का कागज दे दिया जाता है। इसके जरिये वे खाद्यान्न को लेकर सूबे की सीमा को पार कर देते हैं। अगर कहीं खाद्यान्न लदे ट्रक बेंवा के आगे पकड़ लिया जाता है तो माफिया बेंवा, बलरामपुर होते हुए लखीमपुर का रूट का पेपर दिखाकर उसको सही साबित करने की कोशिश करते हैं। इस मामले में रूट का सबसे बड़ा रोल है।


अफसर बोले, होती है जांच
इस बारे में वाणिज्य कर विभाग के सचल दल के असिस्टेंट कमिश्नर राकेश कुमार कहते हैं कि कागजों की जांच की जाती है। साथ ही उस पर जो जुर्माना होता है, उसे लगा दिया जाता हैं। वहीं सीडीओ आरबी सिंह ने बताया कि खाद्यान्न माफियाओं के प्रति कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश वाणिज्य कर और खाद्य और रसद विभाग को दिया गया है। अब उस फर्म पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जहां से गेहूं अवैध तरीके से लोड किया जाता है।

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