शिवालयों में उमड़े श्रद्धालु

Siddhartha nagar Updated Tue, 24 Jul 2012 12:00 PM IST
सिद्धार्थनगर। जिले में सोमवार को नागपंचमी परंपरागत तरीके से मनी। शहर के साथ ग्रामीणांचल में जहां नागदेवता की पूजा हुई, वहीं शिवालयों में भक्तों ने हर-हर महादेव की जयघोष के बीच शिव का जलाभिषेक किया। श्रावण मास के तीसरे सोमवार को नागपंचमी पड़ने से इसका महत्व बढ़ गया।
शिव मंदिरों को विशेष रूप से सजाया गया। यहां सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। मंदिरों के बाहर लोगों ने नागदेवता के दर्शन किए और उन्हें दूध लावा अर्पित किया। नागपंचमी के दिन भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से की जाती है। नाग भगवान शंकर के गण माने जाते हैं। पुराणों में कहा गया है कि नागपंचमी की पूजा विशेष रूप से सर्प दोष को समाप्त करने के साथ ही वंश वृद्धि और धन धान्य को बढ़ाती है। उधर, ग्रामीण क्षेत्रों में भी नागपंचमी उल्लास के साथ मनी। गांवों में नागदेवता को दूध और लावा चढ़ाया गया। पूजन के बाद गाय के गोबर से घर की दीवारों को घेरा गया। मान्यता है कि इस दिन गाय के गोबर से घर की घेराबंदी करने से घर के अंदर जहरीले जंतुओं का प्रवेश नहीं होता। नागपूजा के बाद लोगों ने ब्राह्मणों को भोजन कराकर प्रसाद ग्रहण किया। इटवा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में नागपंचमी धूमधाम से मनी। लोगों ने आस-पास के शिवालयों में भगवान शिव का जलाभिषेक किया। क्षेत्र के कटेश्वरनाथ, शिवशक्ति मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड़ दिखी।
बांसी प्रतिनिधि के अनुसार प्राचीन शिव मंदिरों में भगवान शिव के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने नागदेवता की पूजा की और उन्हें दूध पिलाया। सिकरी प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के शिवालयों में भगवान शिव के साथ साथ नागदेवता की पूजा की गई। नागपंचमी के अवसर पर सिकरी चौराहे पर आल्हा का कार्यक्रम हुआ। उसका बाजार प्रतिनिधि के अनुसार मिश्रा जी के पोखरे पर नागपंचमी के पर्व पर मेला लगाया गया। यहां कुश्ती हुआ।
इनसेट
भाइयों ने गुड़िया पीटा
नागपंचमी के दिन दोपहर बाद जिले के विभिन्न नदी नालों और पोखरों पर गुड़िया पीटने की रस्म अदा की गई। लोगों का मानना है कि महोबा के राजा आल्हा के समय से ही गुड़िया पीटने की परंपरा चली आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस अवसर पर रौनक दिखी। गुड़िया पीटने की रस्म में बहन और भाई दोनों शामिल होते हैं। बहनें पंचमी का गीत गाते हुए गुड़िया फेंकती हैं। भाई बांस अथवा बेर के डंडों से गुड़िया पीटते हैं।
घर की बाउंड्री में मिला अजगर का बच्चा
ककरहवा। इंटर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य के घर की बाउंड्री में रविवार रात अजगर का बच्चा मिला। करीब सत्रह किलोग्राम के अजगर को देख घरवालों के होश उड़ गए। उसे ड्रम में बंद कर वन विभाग को सूचना दी गई। नेहरू इंटर कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य सीताराम मिश्र का घर ककरहवा में हैं। रविवार रात 10 बजे घर की बाउंड्री में अजगर का बच्चा देखा गया। घरवालों ने किसी तरह उसे ड्रम में बंद किया। सुबह अजगर को वनकर्मियों के हवाले कर दिया गया। वन कर्मी सुभाष तिवारी, पल्टू और राममिलन ने बताया कि अजगर का बच्चा बाढ़ में कहीं से आ गया था, उसे ककरहवा जंगल में छोड़ दिया गया है।

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