एक तरफ खेती तो दूसरी ओर हरियाली

Siddhartha nagar Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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सिद्धार्थनगर। हरियाली को लेकर आम जन भले ही गंभीर न हों, लेकिन जेल प्रशासन ने एक अनूठी पहल कर सबको नई दिशा देने का प्रयास किया है। जेल कैंपस में एक साथ दो हजार पौधे लगाने की कवायद शुरू कर दी गई है। पौधे सिर्फ लगेंगे ही नहीं, बल्कि इसकी देखरेख के लिए बाकायदा एक माली चौबीस घंटे जुटा रहेगा। पूर्व के दिनों में जेल के अंदर की तकरीबन ढाई एकड़ बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर कई-कई कुंतल सब्जी उगाकर एक रिकार्ड भी कायम किया गया है।
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तकरीबन डेढ़ दशक पूर्व यहां जिला जेल की स्थापना हुई। जेल के भीतर काफी जमीनें हैं। इन जमीनों में तकरीबन ढाई एकड़ जमीन ऐसी थी, जो हल्की पथरीली थी। इस पर खेती असंभव सा कार्य रहा। अब जेल प्रशासन ने इस जमीन को उपजाऊ बनाने के लिए कार्य शुरू किया। दिन-रात की कड़ी मेहनत तथा कैदियों के जज्बे ने इस पथरीली जमीन को उपजाऊ बना दिया। अब इस जमीन पर सब्जियां इतनी हो जा रही हैं कि जेल के खाने में आलू कम, हरी सब्जियां ही अधिक रह रही हैं। जेल सूत्रों की मानें तो हरी सब्जियां दो-तीन कुंतल से भी अधिक हो जा रही हैं। अब जेल प्रशासन इसे और बढ़ाने के मूड में है।
इसी प्रकार जेल परिसर के बाहर हरियाली लाने के लिए भी प्रयास किया गया है। जेल परिसर में पेड़ पौधों का अभाव है। इसे दूर करने के लिए यहां एक साथ दो हजार पौधे लगाने की तैयारी है। जेल की तरफ से जेलर डीसी मिश्र और डिप्टी जेलर एके झा ने वन विभाग के डीएफओ से मुलाकात कर पौधों की मांग की। यदि पौधों के लिए मंजूरी मिली तो आने वाले दिनों में जेल के बाहर का नजारा एक पार्क की तरह ही नजर आएगा। इस संबंध में जेलर डीसी मिश्र ने कहा कि जेल परिसर को बेहतर बनाने के लिए ये निर्णय लिए जा रहे हैं। इससे जहां जेल का वातावरण स्वच्छ होगा, वहीं सब्जियों के उत्पादन से काफी हद तक कैदियों को बेहतर और पौष्टिक भोजन भी प्राप्त होगा।
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